वाकड के पास हाईवे के काम में तीन बार कटीं भूमिगत केबल, 40,000 उपभोक्ताओं की बिजली गुल
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महावितरण का आरोप है कि मुंबई-बेंगलुरु हाईवे चौड़ीकरण में NHAI के ठेकेदार ने चेतावनियों के बावजूद काम जारी रखा। बावधन पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी गई है।
पुणे में वाकड ब्रिज और चांदनी चौक के बीच मुंबई-बेंगलुरु हाईवे को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी काम के दौरान करीब पंद्रह दिन में तीन बार भूमिगत बिजली केबल क्षतिग्रस्त हुईं। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) ने नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के ठेकेदार पर इसका आरोप लगाया है। कंपनी के मुताबिक इन घटनाओं से करीब 40,000 उपभोक्ताओं की बिजली सप्लाई बाधित हुई।
MSEDCL का कहना है कि बार-बार चेतावनी देने के बाद भी ठेकेदार काम करता रहा।
केबल 16, 17 और 31 अक्टूबर को क्षतिग्रस्त हुईं। 16 अक्टूबर को हाईवे के काम के दौरान बेवर्ली फीडर को बिजली देने वाली 22 केवी की केबल टूट गई। अगले दिन बिटवाइज चौक के पास निया फीडर की एक और 22 केवी केबल को नुकसान पहुंचा। तीसरी घटना 31 अक्टूबर को दर्ज की गई।
औंध डिवीजन के MSEDCL अधिकारियों ने रविवार को बताया कि ठेकेदार ने चांदनी चौक के पास सर्विस रोड पर काम शुरू कर दिया। आरोप है कि इससे पहले यह पक्का नहीं किया गया कि भूमिगत केबल सुरक्षित हैं, और न ही उन्हें हटाया गया। अधिकारियों ने कहा, "एक पखवाड़े के भीतर निर्माण कार्य के दौरान भूमिगत केबल तीन बार क्षतिग्रस्त हुईं। केबल सुरक्षित जगह शिफ्ट होने तक काम रोकने की बार-बार गुजारिश के बावजूद ठेकेदार ने काम जारी रखा। आखिरकार हमने पुलिस के पास जाकर 27 अक्टूबर को लिखित शिकायत दी।"
कंपनी ने यह लिखित शिकायत 27 अक्टूबर को बावधन पुलिस स्टेशन में ठेकेदार के खिलाफ दी। केबल की मरम्मत और बिजली बहाल करने के काम की वजह से MSEDCL ने अपना नुकसान लाखों रुपये का आंका है।
इस हिस्से में 22 केवी की कई हाई-टेंशन और लो-टेंशन भूमिगत केबल हैं। MSEDCL अधिकारियों ने चेताया कि अगर सड़क का काम बिना योजना के आगे बढ़ा, तो ये केबल कंक्रीट के नीचे दब सकती हैं या चौड़ी हुई सड़क के बीच में आ सकती हैं। ऐसी केबल में आगे कोई खराबी आई तो उसे ढूंढना और ठीक करना मुश्किल होगा, और कंक्रीट की सड़क के कुछ हिस्से खोदने पड़ेंगे। इससे बिजली बहाल करने में देर हो सकती है और औंध, बाणेर और महालुंगे के बहुत से उपभोक्ताओं की बिजली जा सकती है।
MSEDCL ने परमिशन न लिए जाने पर भी सवाल उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक भूमिगत केबल तभी शिफ्ट की जानी चाहिए जब कंपनी एस्टिमेट तैयार कर ले और तय मंजूरी प्रक्रिया पूरी हो जाए। MSEDCL के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका की सीमा में काम के लिए NHAI ने MSEDCL से अनुमति ली थी, लेकिन पुणे महानगरपालिका की सीमा के भीतर के काम के लिए ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई।
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