मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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पुणे में ऑटो और कैब ड्राइवरों का कलेक्टर ऑफिस पर प्रदर्शन, बाइक टैक्सी बंद कराने की मांग

पुणे में ऑटो और कैब ड्राइवरों का कलेक्टर ऑफिस पर प्रदर्शन, बाइक टैक्सी बंद कराने की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

महाराष्ट्र कामगार सभा के बैनर तले हजारों ड्राइवर सोमवार को पुणे कलेक्टर ऑफिस के बाहर जमा हुए। उनका कहना है कि गैरकानूनी बाइक टैक्सी उनकी रोजी-रोटी खा रही हैं।

पुणे में सोमवार को कलेक्टर ऑफिस के बाहर ऑटो रिक्शा और कैब चलाने वाले हजारों ड्राइवर इकट्ठा हुए। उनकी मांग है कि बाइक टैक्सी सेवाओं पर कार्रवाई की जाए। ड्राइवरों का कहना है कि ये सेवाएं गैरकानूनी तरीके से चल रही हैं और इससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है।

यह प्रदर्शन महाराष्ट्र कामगार सभा ने आयोजित किया था। ड्राइवरों ने जिला कलेक्टर से मांग की कि रैपिडो के मालिकों और पुणे में उसका कामकाज संभालने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उनका आरोप है कि कंपनी सरकारी नियमों का उल्लंघन करके अब भी बाइक टैक्सी चला रही है।

ड्राइवरों की यह भी मांग है कि कंपनी के प्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। उनके मुताबिक कलेक्टर और रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस यानी आरटीओ ने पहले जो निर्देश दिए थे, कंपनी ने उनका पालन नहीं किया।

ड्राइवरों की दूसरी शिकायत ऐप से चलने वाली कंपनियों ओला, उबर और रैपिडो को लेकर है। उनका कहना है कि ये कंपनियां अपने ऐप पर सरकार से मंजूर किराया नहीं दिखातीं। ड्राइवरों के मुताबिक इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है, और सवारियों को भी साफ पता नहीं चलता कि उन्हें कितना पैसा देना है। उनकी प्रमुख मांगों में से एक यह है कि सभी राइड-हेलिंग कंपनियों को अपने ऐप पर सरकार से मंजूर आधिकारिक मीटर किराया दिखाना जरूरी किया जाए।

सभा ने बताया कि जिला कलेक्टर ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। सभा का दावा है कि कलेक्टर ने पुलिस को निर्देश दिया है कि रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

सभा के अध्यक्ष डॉ. केशव क्षीरसागर ने चेतावनी दी कि अगर आने वाले दिनों में इन कथित गैरकानूनी सेवाओं को बंद नहीं किया गया, तो पुणे के ऑटो रिक्शा और कैब ड्राइवर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को सरकार से मंजूर किराए पर गाड़ी चलाने के अपने हक की भी गारंटी मिलनी चाहिए।

सभा ने यह भी कहा कि इन सेवाओं का ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर क्या असर पड़ रहा है, इस पर सरकार को गौर करना चाहिए और इस मसले पर बिना देरी किए कदम उठाना चाहिए।

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