बुधवार, 4 नवंबर 2026

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दिया मिर्जा का दिवाली संदेश: हाईकोर्ट ने BMC से हटाया गया वीडियो दोबारा अपलोड करने को कहा

दिया मिर्जा का दिवाली संदेश: हाईकोर्ट ने BMC से हटाया गया वीडियो दोबारा अपलोड करने को कहा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कम पटाखों वाली दिवाली के वीडियो पर उठे विवाद में दिया मिर्जा के संदेश की सराहना की और BMC को वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फिर डालने का आदेश दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री दिया मिर्जा के पर्यावरण के अनुकूल दिवाली वीडियो पर छिड़े विवाद को गंभीरता से लिया है। इसे ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ नेताओं के लिए झटका माना जा रहा है।

दिया ने यह वीडियो पटाखों से कम प्रदूषण वाली दिवाली के लिए बनाया था। यह BMC के उस अभियान का हिस्सा था, जिसमें त्योहार को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सेलिब्रिटी लोगों का सहारा लिया गया। कई और सेलिब्रिटी ने भी वीडियो बनाए। दिया का संदेश सीधा था: दिवाली पर पटाखे फोड़िए, लेकिन कम फोड़िए। इसी बात पर सियासी तूफान उठ गया। BJP के कुछ नेताओं ने उन्हें हिंदू विरोधी कहा और उनका वीडियो BMC के सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया गया। अब मामले में हाईकोर्ट ने दखल दिया है।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण पर दिया के जागरूकता संदेश की तारीफ की। अदालत ने कुछ राजनीतिक नेताओं के बयानों पर नाराजगी भी जताई। जस्टिस कुलकर्णी ने सीधा सवाल किया कि जब दिया ने अदालत के ही आदेशों के मुताबिक वीडियो बनाया, तो उनकी भागीदारी का विरोध क्यों हो रहा है। जस्टिस गोखले ने भी साफ कहा, "यह पूरी तरह पर्यावरण का मुद्दा है, इसे कोई और रंग न दें।" उन्होंने यह भी कहा कि सब लोग एक ही हवा में सांस लेते हैं।

बेंच ने संवैधानिक सवाल भी उठाया। उसने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है, तो किसी को दूसरे धर्म का होने की वजह से त्योहार मनाने या जागरूकता अभियान में शामिल होने से कैसे रोका जा सकता है? अदालत ने साफ किया कि पटाखों पर पाबंदी का मतलब त्योहार मनाने का हक छीनना नहीं है। इसके बाद उसने BMC को हटाया गया वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दोबारा अपलोड करने का आदेश दिया।

विवाद की शुरुआत मुंबई BJP अध्यक्ष अमित सातम की टिप्पणी से हुई। उन्होंने X पर लिखा कि दिवाली कैसे मनानी है, यह दिया मिर्जा से सीखने की जरूरत नहीं है, और "हमारी परंपराएं और संस्कृति बहुत गहरी जड़ों से जुड़ी हैं"। मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि दिया मिर्जा हिंदू विरोधी रुख रखती हैं। अदालत की टिप्पणियों पर दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विपक्ष ने तुरंत पलटवार किया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की नवी मुंबई इकाई के प्रवक्ता और शहर अध्यक्ष गजानन काले ने तीखा हमला बोला। उनका दावा है कि अदालत ने दिवाली के बीच सातम को बेइज्जत किया। उन्होंने फैसले को हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने वाली BJP के मुंह पर जोरदार तमाचा बताया।

NCP (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि किसी कलाकार के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव गलत है। उन्होंने पूछा कि पर्यावरण के संदेश में गलत क्या था, और आरोप लगाया कि सातम ने धर्म की राजनीति के लिए बयान को तोड़ा-मरोड़ा। पवार ने मुख्यमंत्री के जवाब का भी जिक्र किया कि इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इसे महानगरपालिका का मामला बताया था। पवार बोले, "आप राज्य में भी सत्ता में हैं और BMC में भी, अमित सातम मुंबई BJP के अध्यक्ष हैं।"

समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कहा कि BMC न अमित सातम की है, न नितेश राणे की, और न ही BJP का पार्टी दफ्तर है। यह सभी मुंबईकरों की है और उन्हीं के पैसे से चलती है। उन्होंने याद दिलाया कि BMC ने खुद दिया मिर्जा को एंबेसडर के तौर पर बुलाया था और हाईकोर्ट के निर्देशों के मुताबिक जागरूकता फैलाने को कहा था। दिया ने वही कहा जो अदालत ने कहा, जैसा माधुरी दीक्षित और दूसरे सेलिब्रिटी ने भी कहा। फिर भी सातम को सिर्फ दिया मिर्जा दिखीं, शेख ने आरोप लगाया, क्योंकि उन्होंने BJP के खिलाफ राय रखी है और उनके नाम में "मिर्जा" है। उन्होंने सातम, राणे और तावड़े से प्रदूषण के असली मुद्दे पर ध्यान देने को कहा। शेख के मुताबिक मुंबई के लोग बीमार पड़ रहे हैं, और एक अभिनेत्री के पीछे पड़ने से कुछ हासिल नहीं होगा।

बात साफ है: अदालत ने कहा है कि मुद्दा हवा का है, धर्म का नहीं। वीडियो फिर से लगेगा, जबकि इस पर सियासी बहस जारी है।

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