दिवाली के किलों के लिए पुणे के बच्चों को मिट्टी नहीं मिल रही, पीएमसी से वितरण केंद्र की मांग
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दिवाली की छुट्टियों में मिट्टी के किले बनाने की परंपरा इस साल मिट्टी की किल्लत से जूझ रही है। प्रशांत कनोजिया ने हर वार्ड ऑफिस के इलाके में मिट्टी वितरण केंद्र बनाने की मांग की है।
पुणे में दिवाली पर मिट्टी के छोटे किले बनाने की परंपरा इस साल एक अड़चन से गुज़र रही है। शहर के कई लोगों को इसके लिए मिट्टी ही नहीं मिल पा रही। नागरिकों और अभिभावकों की इन शिकायतों को सामने रखते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना (MNVS) के राज्य मुख्य संयोजक और कोथरूड सिटिजन फोरम के सदस्य प्रशांत कनोजिया ने पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) से मांग की है कि हर वार्ड ऑफिस के इलाके में मिट्टी मिलने का इंतज़ाम किया जाए।
दिवाली की छुट्टियों में शहर भर के बच्चे मिट्टी के किले बनाते हैं और अक्सर इसमें बड़े भी हाथ बंटाते हैं। इस बहाने नई पीढ़ी तक छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास, किलों की अहमियत और स्वराज्य की प्रेरणा पहुंचती है। कनोजिया का कहना है कि इस बार इसके लिए ज़रूरी मिट्टी आसानी से मिल ही नहीं रही।
उनके मुताबिक मिट्टी का मामला सिर्फ खरीद और बिक्री का नहीं है। यह शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और पहले से योजना बनानी चाहिए, ताकि बच्चों को किले बनाने का सामान मिल सके।
कनोजिया ने सुझाव दिया कि पीएमसी हर वार्ड ऑफिस के इलाके में मिट्टी वितरण का एक आधिकारिक केंद्र बनाए। स्कूलों, मंडलों और बच्चों को यह मिट्टी मुफ्त या मामूली दाम पर दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इन केंद्रों की जगहों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए।
उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि शहर में इस वक्त कई विकास परियोजनाएं और निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन साइटों से जो साफ़ फालतू मिट्टी निकलती है, उसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इकट्ठा किया जाए और नागरिकों को उपलब्ध कराया जाए, यह उनका प्रस्ताव है। साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि वितरण की योजना दिवाली से पहले बने और उसकी पूरी जानकारी पहले ही घोषित कर दी जाए।
उनकी मांगें संक्षेप में ये हैं: हर वार्ड ऑफिस के इलाके में आधिकारिक मिट्टी वितरण केंद्र, निर्माण स्थलों से साफ़ फालतू मिट्टी का पर्यावरण के अनुकूल संग्रह, स्कूलों, मंडलों और बच्चों को मुफ्त या मामूली दाम पर मिट्टी, और दिवाली से पहले वितरण की योजना व उसकी जानकारी का प्रचार।
"यह दुर्भाग्य की बात है कि शहर में इतनी बड़ी विकास परियोजनाएं और निर्माण चल रहे हैं, फिर भी बच्चों को शिवाजी महाराज के किले बनाने के लिए मुट्ठी भर मिट्टी तक नहीं मिल पा रही।"
कनोजिया ने यह भी कहा, "नई पीढ़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास और स्वराज्य की भावना बैठाने के लिए इस परंपरा को मज़बूत करना ज़रूरी है।"
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