एरंडवणे रीडेवलपमेंट विवाद में हाईकोर्ट ने कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति बरकरार रखी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के एरंडवणे में अटके रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में एक पार्टनर को रिसीवर बनाने के आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के एरंडवणे इलाके में अटके एक रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने एक पार्टनर को कोर्ट रिसीवर बनाने का आदेश बरकरार रखा है। इस फैसले में फ्लैट खरीदारों और अपने घर छोड़ चुके हाउसिंग सोसायटी सदस्यों के हक पर खास जोर दिया गया।
जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और डॉ. नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने अक्षय संजय धुमाल की अपील खारिज की। अपील पुणे की कमर्शियल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें कियारा बिल्डकॉन (Kiyaara Buildcon) के दूसरे पार्टनर को न्यायिक निगरानी में निर्माण देखने, रीडेवलपमेंट संभालने और बिना बिके फ्लैटों का काम निपटाने की इजाजत दी गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि एरंडवणे की राधा आनंद को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के 16 सदस्य अपने घर खाली कर किराये के मकानों में रह रहे हैं। जिन खरीदारों ने एग्रीमेंट किए हैं, वे भी कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक धुमाल 24 सितंबर 2021 को कियारा बिल्डकॉन में पार्टनर बने। उन्हें नफे-नुकसान में 33 फीसदी हिस्सा मिला, जबकि दूसरे मुख्य पार्टनर के पास 67 फीसदी हिस्सा था। फर्म सिर्फ एक रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी, जिसमें 47 फ्लैट हैं। इनमें से 18 फ्लैट सोसायटी के मौजूदा सदस्यों के लिए थे और बाकी बिक्री के लिए। सुनवाई के वक्त विंग A का करीब 45 फीसदी और विंग B का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका था।
पैसों के लेनदेन, मैनेजमेंट और तीन फ्लैटों की बिक्री को लेकर विवाद शुरू हुआ। धुमाल का आरोप था कि फ्लैट 502A, 503A और 702B के एग्रीमेंट बाजार भाव से कम दाम पर हुए, जो उनके मुताबिक करीब 17,000 रुपये प्रति वर्ग फुट था। उनका यह भी आरोप था कि खरीदारों से करीब 2 करोड़ रुपये बाकी हैं और सिर्फ 12 लाख रुपये मिले हैं। उन्होंने पार्टनरशिप खत्म करने, हिसाब-किताब देने और प्रोजेक्ट की संपत्तियों की बिक्री पर रोक की मांग की थी।
धुमाल की तरफ से सीनियर एडवोकेट अतुल दामले ने दलील दी कि जिस पार्टनर पर आर्थिक गड़बड़ी के आरोप हैं, उसी को रिसीवर बनाना हितों का गंभीर टकराव है। उनके मुताबिक बैंक खाते चलाने, पार्टनरशिप का पैसा इस्तेमाल करने, निर्माण की निगरानी करने और बिना बिके फ्लैट बेचने की छूट मिलने से धुमाल को आर्थिक नुकसान हो सकता है। अपीलकर्ता का कहना था कि कम कीमत और भरोसे की जिम्मेदारी तोड़ने के आरोप तय नहीं हुए हैं, इसलिए रिसीवर कोई स्वतंत्र तीसरा व्यक्ति होना चाहिए था।
कियारा बिल्डकॉन और बाकी प्रतिवादियों की ओर से एडवोकेट सितेश शर्मा ने कहा कि रिसीवर बनाए गए पार्टनर ने ही प्रोजेक्ट की मंजूरियां, निर्माण का काम और आर्थिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। प्रतिवादियों का दावा है कि उस पार्टनर ने प्रोजेक्ट पर अपनी जेब से 1.82 करोड़ रुपये खर्च किए। उनके मुताबिक धुमाल ने करीब 19.17 लाख रुपये लगाए और फर्म से 95 लाख रुपये लोन के तौर पर निकाले। उन्होंने धुमाल के खिलाफ 7.82 करोड़ रुपये के काउंटरक्लेम का भी जिक्र किया। ये आर्थिक दावे अभी विवादित हैं और अपील में इन पर अंतिम फैसला नहीं हुआ। प्रतिवादियों ने यह भी कहा कि पार्टनरशिप विवाद के बावजूद विस्थापित सदस्यों का किराया और खरीदारों के प्रति जिम्मेदारियां जारी हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि पार्टनरशिप विवाद का असर सिर्फ पार्टनरों तक सीमित नहीं रहता, कोर्ट को उसके नतीजों पर भी सोचना होगा। रीडेवलपमेंट का फायदा पाने की राह देख रहे फ्लैट खरीदारों और सोसायटी सदस्यों के हक अहम हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मौजूदा पार्टनर को रिसीवर बनाने में कोई गैरकानूनी बात नहीं है, खासकर जब प्रोजेक्ट के कमर्शियल और निर्माण इंतजामों से अनजान कोई बाहरी व्यक्ति और दिक्कतें खड़ी कर सकता है। कोर्ट के मुताबिक प्रोजेक्ट को बचाने और प्रभावित लोगों के हित सुरक्षित रखने के लिए यह नियुक्ति सही थी।
बेंच ने दर्ज किया कि पक्षों को तीन बार मीडिएशन में भेजा गया, पर समझौता नहीं हुआ। आगे की बातचीत में धुमाल पांच फ्लैट लेने पर अड़े रहे, जबकि प्रतिवादियों ने कथित तौर पर तीन फ्लैट देने की पेशकश की। सहमति नहीं बनी। बेंच ने कहा कि अपीलकर्ता की फौरी शिकायत सिर्फ तीन फ्लैटों के लेनदेन तक सीमित है, फिर भी अनसुलझे विवाद से पूरा प्रोजेक्ट खतरे में पड़ गया है।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि पुणे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने रिसीवर को प्रोजेक्ट संभालने की इजाजत देते हुए कुछ सुरक्षा शर्तें रखी थीं। फ्लैट बेचने से पहले रिसीवर को कोर्ट में 2 करोड़ रुपये जमा करने थे। साथ ही तय प्रक्रिया पूरी किए बिना और कोर्ट की पहले से सहमति लिए बिना बिक्री के एग्रीमेंट पक्के नहीं किए जा सकते। हाईकोर्ट के मुताबिक इन शर्तों से धुमाल के हित सुरक्षित रहते हैं और निर्माण भी चलता रह सकता है। बिल्डर से संपर्क करने की बार-बार की कोशिशें बेकार रहीं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।