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रविवार, 8 नवंबर 2026

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येमेन में 3 लाख से ज़्यादा लोग बेघर, इनमें करीब 1 लाख 65 हजार बच्चे

येमेन में 3 लाख से ज़्यादा लोग बेघर, इनमें करीब 1 लाख 65 हजार बच्चे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

येमेन में लगातार हिंसा से 3 लाख से ज़्यादा लोगों को घर छोड़ना पड़ा है। यूनिसेफ ने बच्चों की सुरक्षा और भविष्य पर गहरी चिंता जताई है और फौरन मदद की अपील की है।

येमेन में लगातार हिंसा और अस्थिर माहौल की वजह से 3 लाख से ज़्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर पनाह लेनी पड़ी है। इनमें करीब 1 लाख 65 हजार बच्चे शामिल हैं।

ईरान, इस्राइल और अमेरिका की जंग के बीच ही सौदी अरब और येमेन के हुथियों ने फिर से लड़ाई शुरू कर दी है। एक तरफ सौदी समर्थक सरकार और सौदी अरब हैं, दूसरी तरफ हुथी, और यह टकराव अब चरम की ओर जाता दिख रहा है। इनके बीच आम जनता पिस रही है और इसकी सबसे ज़्यादा मार छोटे बच्चों पर पड़ रही है।

सरकारी सेना और हुथी बागियों के बीच की लड़ाई से कई इलाकों में हालात गंभीर हो गए हैं। खासकर पश्चिमी येमेन के इलाकों में हिंसा बढ़ने से लोगों को सुरक्षित जगह की तलाश में दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। कई परिवारों को घर का ज़रूरी सामान उठाने तक का मौका नहीं मिल रहा और वे बेहद मुश्किल हालात में बेघर हो रहे हैं। जितना सामान साथ ले जा सके, उसे लेकर लोग दर-दर भटक रहे हैं। तैज़ इलाके में विस्थापित लोगों की संख्या काफी बढ़ गई है और वहाँ रहने की जगह और बुनियादी सुविधाओं का सवाल गंभीर हो गया है।

चिंता जताई जा रही है कि इस संघर्ष में बच्चों का बचपन छिन रहा है। बेघर हुए बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ रहा है और कई बच्चे पढ़ाई से दूर हो गए हैं। रहने के लिए सुरक्षित जगह, पूरा खाना, साफ पानी और स्वास्थ्य सेवा मिलना भी मुश्किल हो गया है। हिंसा के माहौल में बच्चों के शोषण, कुपोषण और दूसरे खतरों की आशंका बढ़ रही है।

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ ने इन हालात पर गहरी चिंता जताई है। संस्था का कहना है कि विस्थापन की वजह से बच्चों की सुरक्षा, आगे के मौके और बेहतर ज़िंदगी पूरी तरह खतरे में पड़ गई है। यूनिसेफ ने बच्चों की हिफाज़त के लिए फौरन मदद और सुरक्षित माहौल देने की अपील की है।

यूनिसेफ के क्षेत्रीय प्रवक्ता सलीम ओवेस ने भी चिंता जताई है। उनकी जानकारी के मुताबिक 3 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें करीब 1 लाख 65 हजार बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई और सेहत को प्राथमिकता देने की ज़रूरत है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसियाँ बेघर परिवारों तक पानी, खाना, स्वास्थ्य सेवा और बच्चों की सुरक्षा की सुविधाएँ पहुँचाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन बढ़ती लड़ाई और मदद पहुँचाने में आ रही रुकावटों की वजह से हालात और बिगड़ने का डर जताया जा रहा है।

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