मक्का करार सक्रिय, हुथियों के खिलाफ सऊदी की मदद को तैयार पाकिस्तान
सऊदी अरेबिया पर हुथियों के हमले बढ़ने के बाद पाकिस्तान और तुर्कीये के साथ हुआ मक्का संयुक्त करार सक्रिय कर दिया गया है।
येमेन के हुथी बागियों और सऊदी अरेबिया के बीच चल रहा संघर्ष अब नए दौर में पहुंच गया है। दोनों तरफ से पहले भी जोरदार और अहम हमले और जवाबी हमले हो चुके हैं। इसी बीच येमेन की सऊदी समर्थक सरकार ने हुथियों के खिलाफ अपना मोर्चा और मजबूत करना शुरू कर दिया है।
सऊदी अरेबिया पर हुथियों के हमले लगातार होते रहने के बीच पाकिस्तान और तुर्कीये के साथ हुआ मक्का संयुक्त करार सक्रिय कर दिया गया है। हमले बढ़ने के बाद रियाद में करार से जुड़े देशों की तुरंत बैठक हुई, जिसमें सामूहिक रोकथाम के उपाय सक्रिय करने का फैसला लिया गया।
करार के मुताबिक एक सदस्य देश पर हुआ हमला बाकी देशों पर हमला माना जाता है। इसी वजह से सऊदी की हिफाजत के लिए पाकिस्तान और तुर्कीये की तरफ से सैन्य क्षमता मुहैया कराने का रास्ता खुल गया है। करार के तहत सऊदी की सुरक्षा के लिए तय किए गए सैन्य साधन और फौज को तुरंत तैनात करने पर तीनों देशों ने सहमति जताई है।
पाकिस्तान ने सऊदी की सुरक्षा का साथ देने का रुख लिया है और सऊदी में सैन्य दस्ते और जरूरी रक्षा क्षमता तैनात करने पर राजी हो गया है। इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से सऊदी को एयर डिफेंस सिस्टम और दूसरी सैन्य मदद दिए जाने की खबर थी। इसलिए पाकिस्तान के सीधे सैन्य भूमिका में उतरने की संभावना जताई जा रही है।
लेकिन पाकिस्तान येमेन में हुथियों के खिलाफ बड़े पैमाने की जंग में सीधे उतरेगा, या सिर्फ सऊदी की जमीन की हिफाजत तक सीमित रहेगा, यह अभी साफ नहीं है। पाकिस्तान इससे पहले हुथियों के मसले पर कूटनीतिक हल निकालने की जरूरत भी बता चुका है।
कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को हुथियों के खिलाफ उतारने के पीछे अमेरिका का हाथ है। वजह यह बताई जा रही है कि अमेरिका अब खुलकर सऊदी की मदद के लिए हुथियों से नहीं लड़ सकता, क्योंकि ईरान पर चल रही जंग अमेरिका के 70 प्रतिशत लोगों को पसंद नहीं आई है। उनके कहने के मुताबिक मध्य पूर्व की जंग अब अमेरिका की जंग नहीं है, इसलिए अमेरिका को इसमें पड़कर अपना वक्त, पैसा और जानें नहीं गंवानी चाहिए। इसी सबके चलते कहा जा रहा है कि ट्रम्प ने मक्का संयुक्त करार करके पाकिस्तान को बुलाया है।
उधर येमेन में सऊदी समर्थक येमेनी फौज ने हुथियों के कब्जे वाले इलाके वापस लेने के लिए बड़ी सैन्य मुहिम छेड़ दी है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास भी टकराव बढ़ा है। जवाब में हुथियों की तरफ से सऊदी के हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे किए गए हैं। इसलिए येमेन के संघर्ष का असर सऊदी की सुरक्षा व्यवस्था के साथ लाल सागर के व्यापारिक रास्तों पर भी पड़ने की आशंका है।