स्वीडन की संसद ने होलोकॉस्ट से इनकार को अपराध बनाने वाले संविधान संशोधन को दी अंतिम मंजूरी
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स्वीडन की संसद ने 4 नवंबर को संविधान संशोधन पर अंतिम मुहर लगाई। 1 जनवरी 2027 से होलोकॉस्ट और कुछ दूसरे अंतरराष्ट्रीय अपराधों से इनकार या उन्हें कम आंकने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
स्वीडन की संसद ने 4 नवंबर को एक संविधान संशोधन को अंतिम मंजूरी दे दी। इसके जरिए होलोकॉस्ट से इनकार करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाया गया है। होलोकॉस्ट यानी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर की नाज़ी हुकूमत के हाथों हुआ यहूदियों का नरसंहार।
इस फैसले से होलोकॉस्ट समेत कुछ दूसरे अंतरराष्ट्रीय अपराधों से इनकार करने, उनका समर्थन करने या उनकी गंभीरता को कम करके दिखाने के मामले में कानूनी रास्ता अब ज़्यादा साफ हो गया है। यह बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। फैसले के बाद यूरोप में चर्चा तेज हो गई है।
होलोकॉस्ट को दूसरे विश्व युद्ध की सबसे भयानक मानवीय त्रासदी माना जाता है। 1933 से 1945 के बीच जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर और उसकी नाज़ी हुकूमत ने यहूदी समुदाय को निशाना बनाया। यातना शिविरों, गैस चेंबरों और सामूहिक हत्याओं के जरिए करीब 60 लाख यहूदी नागरिकों की जान ले ली गई।
इस नरसंहार में महिलाएं, बच्चे, बुज़ुर्ग और आम नागरिक भी शामिल थे। कानून के पीछे सोच यह है कि इस ऐतिहासिक सच से इनकार करना या उसका समर्थन करना पीड़ितों के दर्द और इतिहास की हकीकत को नकारना है।
संसद से पास हुए संशोधन से नफरत भरे बयानों पर मौजूदा प्रावधान का दायरा और बढ़ जाएगा। होलोकॉस्ट से इनकार, अदालत में साबित हो चुके कुछ नरसंहारों या मानवता के खिलाफ अपराधों से इनकार, और ऐसे अपराधों का जानबूझकर समर्थन करना, उनका प्रचार-प्रसार करना या उन्हें कम करके आंकना, इन सबको कानून में साफ तौर पर शामिल किया गया है।
हालांकि हर ऐतिहासिक चर्चा या राय अपने आप अपराध नहीं मानी जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि बयान सुरक्षित समुदाय के खिलाफ नफरत, धमकी या हिंसा के समर्थन या बढ़ावे की कानूनी शर्तें पूरी करे। इस तरह अभिव्यक्ति की आज़ादी और नफरत भरे प्रचार के बीच की सीमा साफ करने की कोशिश की गई है।
नए संशोधन का खास असर मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि स्वीडन में कुछ प्रकाशनों को प्रेस और अभिव्यक्ति की आज़ादी की संवैधानिक सुरक्षा मिलती है। ऐसे माध्यमों में नरसंहार करने वाला या खास समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला मजमून छपे तो उस पर कार्रवाई का कानूनी आधार अब ज़्यादा साफ होगा।
स्वीडन में संविधान संशोधन पास करने के लिए संसद के दो अलग फैसले और बीच में आम चुनाव जरूरी होता है। पहली मंजूरी मई 2024 में मिली थी, जबकि दूसरी और अंतिम मंजूरी नवंबर 2026 में दी गई है। अब यह संवैधानिक बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू होगा।


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