येमेन सरकार का आरोप: हूथियों ने ईरानी एयर डिफेंस हथियारों को क्रूज मिसाइल बना लिया
येमेन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का दावा है कि हूथी बागियों ने ईरान से मिले हवाई सुरक्षा हथियारों को बदलकर क्रूज मिसाइल बना लिया।
येमेन में चल रहा संघर्ष एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। येमेन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूथी बागियों पर गंभीर आरोप लगाया है। दावा किया गया है कि हूथियों ने ईरान से मिले हवाई सुरक्षा के हथियारों में बदलाव करके उन्हें क्रूज मिसाइल में बदल दिया है।
येमेन सरकार का यह भी कहना है कि इस काम में ईरान की इस्लामिक रिव्होल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के विशेषज्ञों ने मदद की। इन हथियारों की वजह से लाल सागर के दक्षिणी हिस्से के अंतरराष्ट्रीय हवाई रास्तों और नागरिक विमानों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
येमेन के सैन्य अधिकारियों के दावे के मुताबिक हूथियों ने ईरान से मिले कुछ हवाई सुरक्षा हथियारों में तकनीकी बदलाव किए हैं। इसके बाद उनका इस्तेमाल क्रूज मिसाइल की तरह किया जा रहा है, ऐसा बताया गया है। आरोप है कि ये मिसाइलें पश्चिमी येमेन के होदेइदाह इलाके से अंतरराष्ट्रीय हवाई रास्तों की तरफ दागी जा रही हैं।
दावा यह भी किया गया है कि इन हथियारों में गर्मी को पकड़ने वाला सिस्टम है। इसलिए विमानों के इंजन से निकलने वाली गर्मी का पीछा करने की क्षमता इनमें हो सकती है। येमेन की सेना के अनुसार ये मिसाइलें हवा में करीब 25 मिनट तक घूम सकती हैं।
येमेन सरकार ने इन हथियारों में हुए बदलाव के पीछे IRGC के विशेषज्ञों की भूमिका बताई है। येमेन के सैन्य प्रवक्ता की दी हुई जानकारी के मुताबिक हूथियों के कंट्रोल वाले इलाकों में काम कर रहे ईरानी विशेषज्ञों ने इन हथियारों में जरूरी तकनीकी बदलाव करने में मदद की।
पहले भी अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आया है कि हूथियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता के लिए ईरान से मदद मिलती रही है। लेकिन ईरान हूथियों को इस तरह की सैन्य मदद देने के आरोपों को कई बार नकार चुका है। इसलिए मौजूदा दावे को येमेन सरकार का लगाया हुआ आरोप ही माना जा रहा है।
सबसे बड़ी चिंता नागरिक विमान सेवाओं की सुरक्षा को लेकर जताई जा रही है। लाल सागर के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई रास्ते येमेन के आसपास के संघर्ष की वजह से पहले ही संवेदनशील माने जाते हैं। येमेन की सेना ने दावा किया है कि इस हालात में कमर्शियल विमानों के साथ संयुक्त राष्ट्र और मानवीय संस्थाओं के विमानों को भी खतरा हो सकता है।
इन आरोपों पर हूथी बागियों या ईरान की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसलिए इन हथियारों की असल प्रकृति, उनकी संख्या और असल इस्तेमाल के बारे में स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है।