सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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12:37 IST

यवतमाल में कपास 9,600 रुपये क्विंटल तक पहुंचा, पर बारिश से पैदावार घटी

बाजार में कपास के दाम चढ़े हैं, लेकिन बारिश की बेरुखी से किसानों की पैदावार में भारी गिरावट की आशंका है।

यवतमाल में कपास 9,600 रुपये क्विंटल तक पहुंचा, पर बारिश से पैदावार घटी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

यवतमाल में इस साल बारिश के मिजाज ने किसानों की कपास की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। इसके बावजूद बाजार में कपास के दाम में जोरदार उछाल आया है। एक तरफ बारिश के अनियमित रहने से कपास की बढ़त रुक गई और बोंड और पत्ते झड़ गए। दूसरी तरफ बाजार में "सफेद सोने" का भाव सीधे 9 हजार 600 रुपये तक पहुंच गया है। अच्छी क्वालिटी के कपास को निजी व्यापारियों से प्रति क्विंटल 9 हजार 600 रुपये तक दाम मिल रहा है। इस साल बारिश देर से आई, इसलिए बुवाई में भी देरी हुई।

बाजार की तेजी बनी रही तो कपास का भाव 12 हजार रुपये के मुकाम तक पहुंचेगा या नहीं, इस पर अब किसानों और व्यापारियों की नजर टिकी है।

बारिश ने पीठ फेर ली तो कपास की बढ़त पर असर पड़ा। पानी की कमी से पौधों की बढ़त रुक गई और बोंड और पत्ते गिर गए। इस वजह से सिंचाई वाले खेतों में भी कपास की पैदावार प्रति एकड़ चार से पांच क्विंटल तक सीमित रहने की आशंका जताई जा रही है। बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसानों का हाल और बुरा है। उन्हें यह चिंता सता रही है कि प्रति एकड़ एक से दो क्विंटल कपास भी हाथ आएगा या नहीं। पैदावार में बड़ी गिरावट की आशंका है, इसलिए अंदाजा है कि बाजार में कच्चे कपास की आवक कम रहेगी। मांग बनी रहे और सप्लाई घटे तो कपास के दाम और बढ़ सकते हैं।

कपास की उपलब्धता कम पड़ने की संभावना से जिनिंग कारखाना मालिकों और व्यापारियों की दौड़भाग शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि कच्चे कपास के दाम नौ हजार रुपये से आगे निकल गए हैं। कपास हासिल करने के लिए व्यापारी सीधे किसानों के खेत की मेड़ तक पहुंच रहे हैं। खेत से ही कपास खरीदने की इस कोशिश से बाजार में होड़ बढ़ने के आसार हैं। आगे दाम किस तरफ जाएंगे, यह कपास की आवक और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा, इसलिए किसानों की नजर बाजार भाव पर लगी है।

पिछले तीन से चार साल की तुलना में इस बार कपास को प्रति क्विंटल 10 से 13 हजार रुपये तक दाम मिलने की उम्मीद बनी है। सूखे के साए में जी रहे किसानों के लिए बढ़ते दाम राहत की बात हो सकते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि बारिश की वजह से पैदावार में ही भारी गिरावट आई तो इस तेजी का फायदा कितना मिलेगा। कपास का भाव दस हजार रुपये की दहलीज तक पहुंचने की संभावना है, फिर भी बढ़े हुए दाम का सीधा फायदा किसानों को तभी मिलेगा, जब उनके पास बेचने लायक कपास पर्याप्त मात्रा में हो।

केंद्र सरकार ने इस साल मध्यम रेशे के कपास के लिए प्रति क्विंटल 8 हजार 120 रुपये और लंबे रेशे के कपास के लिए 8 हजार 667 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित किया है। भारतीय कपास निगम यानी सीसीआई की ओर से भी खरीद की तैयारी है। फिर भी खुले बाजार में समर्थन मूल्य से ज्यादा दाम मिल रहा है, इसलिए किसान निजी व्यापारियों को कपास बेचने को तरजीह दे रहे हैं। नतीजा यह है कि सरकारी खरीद के मुकाबले खुले बाजार के सौदों की तरफ किसानों का झुकाव बढ़ता दिख रहा है।

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