यवतमाळ में बारिश की कमी से सोयाबीन की फसल पीली पड़ी, कीड़ों का भी हमला
शेंगा भरने की अहम अवस्था में पानी न मिलने से यवतमाळ जिले में सोयाबीन और कपास की फसल मुरझाने लगी है, वहीं बादलों भरे मौसम में कीड़ों का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता दोगुनी हो गई है।
बादल तो घिर आते हैं, मगर बरसते नहीं। यवतमाळ जिले में बारिश के इसी लंबे अंतराल ने खरीफ सीजन की सोयाबीन फसल का हाल बुरा कर दिया है। जिस वक्त शेंगा भरने की सबसे जरूरी अवस्था में पौधों को पानी चाहिए था, ठीक उसी वक्त जमीन की नमी तेजी से घट रही है। इसी वजह से कई इलाकों में सोयाबीन के पत्ते पीले पड़ने लगे हैं और पौधे मुरझा रहे हैं। ऊपर से बादलों भरे और उमस भरे मौसम ने कीड़ों का प्रकोप और बढ़ा दिया है, जिससे किसानों के सामने अब दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है।
इस साल खरीफ सीजन में जिले में सोयाबीन का रकबा करीब 2 लाख 72 हजार 498 हेक्टेयर है। इतने बड़े रकबे पर इस बार सोयाबीन की बुवाई हुई है, और अब इसी बड़े क्षेत्र की फसल को बारिश के अंतराल की मार झेलनी पड़ रही है। अगस्त महीने से लेकर अब तक बारिश की अनियमितता और लंबे गैप का सीधा असर फसलों की हालत पर दिखने लगा है।
यवतमाळ तालुका समेत पूरे जिले में सोयाबीन पीला पड़ चुका है और फसलें मुरझा गई हैं। शेंगा भरने की अवस्था में नमी की कमी से पैदावार घटने का डर सता रहा है। उमस भरे मौसम में सोयाबीन पर बीमारी बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। कुछ इलाकों में किसानों को पत्तों पर दाग, पीलापन और कीड़ों का असर साफ नजर आ रहा है। इसी बीच कपास की फसल का हाल भी कुछ ऐसा ही है। बारिश के भरोसे लगाए गए कपास के पौधे मुरझा रहे हैं, वहीं जिन किसानों के पास सिंचाई का इंतजाम है, वे अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में जुटे नजर आ रहे हैं।
इस बार 4 लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई थी, जिसमें से 50 फीसदी कपास बुवाई क्षेत्र में पौधों की बढ़त रुक गई है। कई जगहों पर पौधों पर फूल आने के बाद भी उनकी बढ़त न होने की शिकायत किसान कर रहे हैं। यवतमाळ तालुका के चिकणी कसबा गांव के छोटे किसान दीपक तायडे के पास 3 एकर खेती है। पिछले साल गीले सूखे की वजह से उनकी फसल बर्बाद हो गई थी, जिसके चलते शादी की उम्र वाली बेटी की शादी भी नहीं हो पाई थी।
बारिश न होने से जमीन में मौजूद नमी लगातार कम हो रही है, जिसका सबसे ज्यादा असर हल्की जमीन वाले सोयाबीन पर पड़ रहा है। पत्तों का पीला पड़ना, पौधों की बढ़त रुकना, पत्ते सूखना और पौधे मुरझाना जैसे लक्षण कई खेतों में दिख रहे हैं। खासकर शेंगा भरने की अवस्था में फसल को नमी न मिलने पर दाना भरने पर सीधा असर पड़ने का डर है।
सोयाबीन के उत्पादन के लिए यह समय बेहद अहम माना जा रहा है। इस अवस्था में पर्याप्त नमी मिलने पर शेंगों में दाना भरने में मदद मिलती है। लेकिन अगर बारिश का अंतराल और बढ़ा तो शेंगा कम भरना, दाने का आकार छोटा रहना और नतीजतन पैदावार घटने का खतरा बढ़ जाएगा। यही वजह है कि किसानों की नजरें फिलहाल आसमान पर टिकी हैं। अगर बारिश का यह गैप और लंबा खिंचा, तो इस साल सोयाबीन के उत्पादन को बड़ा झटका लगने की आशंका है।