नागपुर स्नातक सीट: 23 अक्टूबर को मतदान, कांग्रेस में बंजारी आगे, भाजपा में नाम तय नहीं
विधान परिषद के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 6 अक्टूबर को नामांकन, दावेदारों की संख्या बढ़ी
विधान परिषद की नागपुर स्नातक सीट के लिए चुनाव की तारीख तय हो गई है। 23 अक्टूबर को इस सीट पर वोटिंग होगी, जबकि उम्मीदवार 6 अक्टूबर को अपने नामांकन दाखिल करेंगे। कांग्रेस की तरफ से तस्वीर लगभग साफ है, पार्टी के मौजूदा विप सदस्य अभिजीत बंजारी के दोबारा मैदान में उतरने की पूरी संभावना बताई जा रही है। लेकिन भाजपा में अभी तक कुछ भी तय नहीं हो पाया है।
पहले यह कहा गया था कि मतदाता पंजीयन का काम देख रहे सुधाकर कोहले को इस सीट से टिकट देने का भरोसा दिलाया गया था। इस मुद्दे पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने साफ किया कि उम्मीदवार कौन होगा, यह फैसला प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पार्टी के संसदीय बोर्ड के हाथ में है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के हिस्से में आई इस सीट को जीतने के लिए संगठन स्तर पर जरूरी तैयारी की जाएगी।
भाजपा के अंदर इस सीट के लिए दावेदारों की लाइन लंबी होती जा रही है। पूर्व विधायक सुधाकर कोहले का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन इस सीट से पहले जीत चुके अनिल सोले ने भी हाल ही में अपने जन्मदिन पर हुए एक कार्यक्रम में ताकत दिखाकर अपनी दावेदारी का इशारा दे दिया है।
इसके अलावा संदीप जोशी भी इस रेस में जोर लगाते दिख रहे हैं। कुछ समय पहले जोशी ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर सबको चौंका दिया था, मगर कुछ दिन बाद ही उन्होंने पलटी मारते हुए राजनीति में बने रहने के संकेत दे दिए थे। अब चर्चा है कि वे नागपुर स्नातक सीट से भी दावेदारी ठोक सकते हैं। पिछले कुछ समय से उनकी बढ़ी हुई सक्रियता के चलते ही ये कयास तेज हुए हैं। हमेशा की तरह भाजपा इस सीट पर उम्मीदवारी को लेकर कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने ला सकती है।
इसी बीच बावनकुले ने एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी बात रखी। उन्होंने बताया कि लंबे समय से यह मांग हो रही थी कि महाराष्ट्र राज्य से बाहर जा चुके या दूसरी जगह पक्के तौर पर शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम, मरे हुए लोगों के नाम और एक ही व्यक्ति के दो-दो नाम मतदाता सूची से हटाए जाएं। इसी काम के लिए एसआईआर की प्रक्रिया जरूरी है।
उन्होंने कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक पार्टियों के बूथ लेवल एजेंटों से अपील की कि वे मतदाता सूचियों को खुद जांचें और जो भी गड़बड़ी मिले उसे सुधरवाएं। बावनकुले का कहना था कि केवल आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को खुद आगे आकर मतदाता सूचियों का सत्यापन करना चाहिए।