चंद्रपुर में सूखे जैसे हालात, जोरगेवार ने CSR फंड से बांध बनवाने की मांग रखी
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विधायक किशोर जोरगेवार ने जिलाधिकारी को पत्र देकर वेकोलि, महाजेनको और सीमेंट कंपनियों के CSR फंड से तुरंत जलसंधारण के बांध बनवाने की मांग की है।
चंद्रपुर जिले में इस बार मानसून ने कम साथ दिया और इसका नतीजा यह है कि कई जगह सूखे जैसी हालत बन गई है। विधायक किशोर जोरगेवार ने इसी हालत को देखते हुए जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजी है। उनका कहना है कि अगली गर्मी में लोगों को पानी के लिए तरसना न पड़े, इसके लिए तैयारी आज से ही शुरू हो जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जिले के बड़े उद्योग अपने CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) फंड से जल्द बांध बनवाएं।
चिट्ठी के मुताबिक अभी जिले की कुछ नदियों, नालों और ओढ़ों में, यानी छोटी जलधाराओं में, पानी बह रहा है। विधायक चाहते हैं कि यह पानी आगे बह जाने से पहले रोक लिया जाए, ताकि वह जमीन में उतरे और भूजल का स्तर ऊपर आए। इस काम के लिए वेकोलि, महाजेनको, सीमेंट कंपनियों और दूसरे बड़े उद्योगों से उन्होंने अपेक्षा रखी है कि वे अपने CSR फंड से बांध खड़े करवाएं।
जोरगेवार ने लिखा है कि कम बारिश की मार सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, कई दूसरे क्षेत्र भी इसकी चपेट में आए हैं। बारिश ने धोखा दिया तो किसानों के सामने खेत सींचने का सवाल खड़ा हो गया है। आगे चलकर उद्योगों को भी पानी जुटाने में परेशानी हो सकती है। फिलहाल कुछ जलस्रोतों में पानी है, पर तापमान चढ़ रहा है और बारिश की कमी बनी हुई है, इसलिए आने वाले दिनों में ये स्रोत सूख सकते हैं। विधायक की राय में ऐसे में बहते पानी को रोककर सहेजना बेहद जरूरी हो गया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भूजल लगातार नीचे खिसक रहा है। इसलिए अगली गर्मी में पीने के पानी का संकट गहरा जाए, इस आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। उनके हिसाब से गर्मी आने के बाद सिर्फ टैंकर चलाने या दूसरे वैकल्पिक इंतजाम करने से काम नहीं चलेगा, पानी रोकने और बचाने के काम अभी से हाथ में लेने होंगे। अगर पानी सही जगहों पर रोका गया तो भूजल बढ़ने में मदद मिलेगी और इसका लाभ किसानों, आम लोगों और उद्योगों, तीनों को मिलेगा।
जोरगेवार का प्रस्ताव है कि वेकोलि, महाजेनको, सीमेंट उद्योग और बाकी कंपनियां अपने CSR फंड से कम से कम एक जल संरक्षण का काम जरूर उठाएं। इसमें प्लास्टिक के बांध, सीमेंट के नाला बांध और वनराई बांध जैसे तरीके अपनाए जाएं, यह उनकी मांग है।
काम कैसे शुरू हो, इस पर भी उन्होंने सुझाव दिए हैं। सबसे पहले राजस्व और सिंचाई विभाग (जल संसाधन विभाग, जिसे मराठी में पाटबंधारे विभाग कहते हैं) के जरिए जिले की उन नदियों, नालों और ओढ़ों का फौरन सर्वे कराया जाए, जिनमें अभी पानी बह रहा है। सर्वे के बाद पानी रोकने के लिए ठीक जगहें तय हों और उसी हिसाब से बांधों की योजना बने। उनका यह भी कहना है कि कंपनियां सिर्फ रकम देकर पल्ला न झाड़ें, बल्कि जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनें और जरूरी मजदूर भी अपनी तरफ से लगाएं। इससे काम तेजी से निपट सकेगा और प्रशासन पर अलग से बोझ नहीं पड़ेगा।
विधायक ने जिलाधिकारी से यह भी कहा है कि वे खुद पहल करके जिले की सभी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक तुरंत बुलाएं। उस बैठक में CSR फंड से होने वाले जल संरक्षण के कामों की रूपरेखा बने और हर कंपनी को कम से कम एक काम की जिम्मेदारी दी जाए।
अपनी अपील में किशोर जोरगेवार ने कहा कि अगली गर्मी में लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना न पड़े, किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिले और उद्योगों को भी कमी का सामना न करना पड़े, यही मकसद होना चाहिए। उनके मुताबिक जो जलस्रोत अभी मौजूद हैं, उन्हें बचाना सबकी साझा जिम्मेदारी है। प्रशासन और औद्योगिक कंपनियां आपस में तालमेल बिठाकर बिना देरी किए इस काम में जुट जाएं, यही उनकी गुजारिश है।
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