शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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टैक्स लेते हो तो सुविधाएं क्यू नहीं देते?

टैक्स लेते हो तो सुविधाएं क्यू नहीं देते? तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

हाईकोर्ट ने अमरावती मनपा को लगाई कड़ी फटकार, 3 नवंबर तक मांगा ठोस जवाब, वरना कमिश्नर को होना पड़ेगा अदालत में पेश

नागपुर.

जनता समय पर टैक्स भरे और बदले में उसे गड्ढों से भरी सड़कें मिलें! आखिर यह कैसा प्रशासन है? अमरावती शहर की बदहाल सड़कों को लेकर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने मनपा को जमकर फटकार लगाई है. अदालत ने दो टूक सवाल किया कि जब जनता से टैक्स वसूला जाता है, तो उसे बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं दी जातीं.

अमरावती के कैंप परिसर की सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने शुक्रवार को अमरावती मनपा से जवाब मांगा. अदालत ने सवाल उठाया कि शहर के दूसरे विकास कार्यों के लिए फंड उपलब्ध हो जाता है, तो फिर सड़कों की मरम्मत के लिए पैसा क्यों नहीं मिलता?

गड्ढों की तस्वीरें देखकर अदालत भी नाराज!

जनमंच की ओर से दायर जनहित याचिका में अमरावती के कैंप परिसर की बदहाल सड़कों का मुद्दा उठाया गया था. मीडिया ने भी इस मुद्दे को उजागर किया था. सड़कों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं. हालात ऐसे हैं कि कई जगह सड़कें गड्ढों में गुम होती नजर आती हैं. इससे पहले भी अदालत ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'न्याय के मंदिर के सामने ही यह अन्याय है।'

सिर्फ काम शुरू होने का दावा काफी नहीं

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से अदालत को बताया गया कि सड़कों की मरम्मत के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं और गड्ढे भरने का काम शुरू है. लेकिन जब अदालत के सामने काम से संबंधित तस्वीरें रखी गईं, तो खंडपीठ ने नाराजगी जताई. अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ काम शुरू होने की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है. मनपा को बताना होगा कि सड़कों की समस्या दूर करने के लिए आखिर ठोस योजना क्या है.

3 नवंबर तक जवाब दो, वरना कमिश्नर होंगे तलब

हाईकोर्ट ने अमरावती मनपा को 3 नवंबर तक ठोस उपाययोजनाओं के साथ शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने चेतावनी भी दी कि यदि निर्धारित समय में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो मनपा आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया जा सकता है. इस मामले में याचिकाकर्ता जनमंच की ओर से अधिवक्ता परवेज मिर्जा और अधिवक्ता मृणाल चक्रवर्ती ने पक्ष रखा.

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