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संभावित चारा किल्लत से निपटने के लिए अभी से असरदार नियोजन करें: कलेक्टर पंत

संभावित चारा किल्लत से निपटने के लिए अभी से असरदार नियोजन करें: कलेक्टर पंत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

चंद्रपुर में सूखे जैसे हालात को देखते हुए कलेक्टर वसुमना पंत ने चारा उत्पादन और प्रबंधन के लिए विभागों को निर्देश दिए।

चंद्रपुर जिले में सूखे जैसे हालात हैं। इसे देखते हुए आगे जानवरों के लिए चारे की कमी न हो, इसके लिए अभी से व्यापक और असरदार नियोजन जरूरी है। कलेक्टर वसुमना पंत ने धान की कटाई के बाद मिलने वाली पराली बेकार न जाने देने और उसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल जानवरों के चारे के लिए करने को कहा। किसान हार्वेस्टर मशीन की बजाय जहां तक हो सके मजदूरों से धान की कटाई कराएं। चारे के उत्पादन, संवर्धन और भंडारण के लिए सभी संबंधित विभाग तालमेल से काम करें, ऐसे निर्देश भी उन्होंने दिए।

चारा उत्पादन और प्रबंधन के नियोजन पर बुलाई गई समीक्षा बैठक में वे बोल रही थीं। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, निवासी उपजिलाधिकारी दगडू कुंभार, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी शंकर तोटावार, उपजिलाधिकारी संजय पवार, पशुपालन उपायुक्त डॉ. सुरेश कुंभरे, मृदा और जल संरक्षण अधिकारी नीलिमा मंडपे, विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले और दूसरे विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

पंत ने कहा कि हार्वेस्टर से कटाई करने पर बड़ी मात्रा में पराली खेत में ही रह जाती है, या चारे के लिए उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। मजदूरों से कटाई कराने पर पराली ठीक से इकट्ठा करके जानवरों के चारे के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है। इसलिए किसानों को दोनों तरीकों का फर्क खेत पर प्रदर्शन करके समझाया जाए।

पहले प्रयोग के तौर पर पांच गांव चुनकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। फिर हर तालुका के कम से कम दस गांवों में कृषि, पशुपालन, राजस्व, ग्रामविकास और वन विभाग के अफसर और कर्मचारी मिलकर किसानों और पशुपालकों को मार्गदर्शन दें।

आगे उन्होंने कहा कि मौजूद चारा बर्बाद न हो, इसके लिए चारा कुट्टी मशीनों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाए। विदर्भ-मराठवाड़ा दुग्ध विकास प्रकल्प के तहत ज्यादा से ज्यादा किसानों और पशुपालकों को बिजली से चलने वाली चारा कुट्टी मशीनों का लाभ दिलाया जाए।

कम पानी में चारा उगाने के लिए हाइड्रोपोनिक तरीके से मक्के का चारा बनाने को बढ़ावा दिया जाए। खासकर सीमित पानी वाले पशुपालकों को इस तकनीक का प्रदर्शन दिखाकर फायदे बताए जाएं। आधुनिक तकनीक, ट्रेनिंग और दृश्य-श्रव्य माध्यमों से किसानों में चारा उत्पादन को लेकर जागरूकता फैलाई जाए, ऐसी सूचनाएं भी कलेक्टर ने दीं।

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