मराठवाड़ा वॉटर ग्रिड पर फडणवीस का जोर, जायका से करीब 20 हजार करोड़ की मदद का इशारा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रारंभिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट जल्द अपलोड कर केंद्र के आर्थिक कार्य विभाग को भेजने को कहा है। पहले चरण में चार जिले शामिल हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठवाड़ा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट मराठवाड़ा की पानी की किल्लत का स्थायी हल निकालने और इस इलाके को सूखे से मुक्त करने के लिहाज से अहम है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रिपोर्ट तुरंत अपलोड की जाए और उसे केंद्र सरकार के आर्थिक कार्य विभाग को भेजने की कार्रवाई तेजी से पूरी हो।
यह निर्देश मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में दिए गए। बैठक जायका के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ थी और उसकी अध्यक्षता फडणवीस ने की। इसमें वॉटर ग्रिड के खाके के साथ महाराष्ट्र और जापान के सहयोग से चल रहे कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा भी हुई। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिलने वाली है।
मराठवाड़ा में पानी का बंटवारा बराबर नहीं है। इसी को देखते हुए वॉटर ग्रिड का मुख्य मकसद यह है कि जिन बांधों में ज्यादा पानी है, वहां से बंद पाइपलाइन के जरिए सूखा झेल रहे इलाकों के बांधों तक पानी पहुंचाया जाए। इसके लिए दोहरे प्रवाह की व्यवस्था तैयार की जाएगी।
पहले चरण में छत्रपति संभाजीनगर, बीड, लातूर और धाराशिव, ये चार जिले आएंगे। जायकवाड़ी, माजलगांव, मांजरा, उजनी, निम्न तेरणा और निम्न मनार बांध आपस में जोड़े जाएंगे। इसके लिए करीब 3 हजार 95 किलोमीटर लंबी मुख्य और सहायक पाइपलाइन बिछेगी और 15 जल शुद्धीकरण केंद्र बनेंगे। करीब एक करोड़ लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
आठों जिलों को मिलाकर पूरे वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 25 हजार 56 करोड़ रुपये है। पहले चरण के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज देने पर जायका ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
लातूर और धाराशिव भूकंप संभावित क्षेत्र में आते हैं, इसलिए निर्माण में जापान की उन्नत भूकंपरोधी तकनीक इस्तेमाल होगी। इसमें डक्टाइल आयरन पाइप, आधुनिक पंपिंग सिस्टम और SCADA प्रणाली शामिल होगी। छत्रपति संभाजीनगर के ऑरिक सिटी, शेंद्रा-बिडकीन और वालूज औद्योगिक इलाकों के उद्योगों को भी इस प्रोजेक्ट से टिकाऊ पानी सप्लाई मिलने में मदद होगी।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट की नियुक्ति और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनाने की प्रक्रिया जायका के सहयोग से जल्द पूरी की जाएगी। प्रोजेक्ट का असल काम 2029 तक पूरा करने की दृष्टि से योजना बनाई गई है।
बैठक में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र का भी जिक्र हुआ। जापानी कंपनियों और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) के सहयोग से इस क्षेत्र में महाराष्ट्र को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाने के लिए पहल चल रही है। इसी के तहत फरवरी में मुंबई में 'मांगा कारवां' आयोजित होगा, जिसका मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्वागत किया।
फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पानी, परिवहन, पर्यावरण और आधुनिक तकनीक के प्रोजेक्ट्स के लिए जापान के साथ सहयोग और मजबूत करेगी और सभी प्रोजेक्ट्स को सरकार की तरफ से हर जरूरी मदद दी जाएगी।
बैठक में जलापूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील, राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर, मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रवीणसिंह परदेशी, जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग के अपर मुख्य सचिव पराग जैन नैनुटिया, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के सदस्य सचिव अमगोथू नाईक और 'मित्रा' के विभाग प्रमुख डॉ. संजय बेलसरे मौजूद थे। भारत में जापान की महावाणिज्यदूत हितोमी सातो, वाणिज्यदूत केन्जी ताकागी और जायका इंडिया की मुख्य प्रतिनिधि ताकुरो ताकेउची भी बैठक में शामिल हुए।
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