मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
19:00 IST

UPI से शेयर खरीदने पर नया चार्ज, बोझ ब्रोकर पर या निवेशक पर, बहस शुरू

15 अक्टूबर से शेयर बाजार से जुड़े UPI पेमेंट पर 0.02% MDR चार्ज लगेगा, अब सवाल यह है कि यह खर्चा कौन भरेगा

UPI से शेयर खरीदने पर नया चार्ज, बोझ ब्रोकर पर या निवेशक पर, बहस शुरू
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

UPI पर लगने वाले चार्ज को लेकर देशभर में जो हलचल मची है, वह अब शेयर बाजार तक भी पहुंच गई है। अभी तक यह बहस दुकानदारों और व्यापारियों तक सीमित थी, जो इस अतिरिक्त बोझ से नाराज हैं। लेकिन अब यही मुद्दा स्टॉक मार्केट में पैसे लगाने वालों के लिए भी सिरदर्द बन सकता है।

इस बारे में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और सरकार के बीच बातचीत चल रही है, ऐसी खबर सामने आई है। इसी विषय पर NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर आशिष कुमार चौहान ने हाल में अपनी बात रखी। सवाल यही है कि इस नए चार्ज का बोझ आखिर किसके सिर पड़ेगा, ब्रोकर के या फिर निवेशकों के।

'इकॉनॉमिक टाइम्स' से बात करते हुए आशिष कुमार चौहान ने साफ किया कि UPI के लिए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर NSE ने सरकार के साथ अभी तक कोई चर्चा नहीं की है। उनका कहना था कि यह मामला पूरी तरह से स्टॉक ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के बीच का है। इन नए चार्जेस को कैसे संभालना है, यह फैसला उन्हें आपस में मिलकर लेना होगा।

15 अक्टूबर, 2026 से शेयर बाजार और अन्य कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट पर 0.02% MDR लागू हो जाएगा। इसमें शेयर्स, सिक्योरिटीज, म्युचुअल फंड और स्टॉकब्रोकर्स से जुड़े पेमेंट शामिल हैं। हालांकि इस चार्ज की एक अधिकतम सीमा भी तय की गई है, प्रति ट्रांजैक्शन Rs 300। यानी बड़े पेमेंट पर भी MDR प्रति ट्रांजैक्शन Rs 300 से ज्यादा नहीं होगा।

MDR सीधे ग्राहक से नहीं वसूला जाता। यह खर्चा व्यापारी को, यानी पैसे लेने वाले पक्ष को उठाना पड़ता है। असली सवाल यह है कि यह अतिरिक्त खर्चा ब्रोकर या दूसरी कंपनियां खुद भरेंगी, या फिर आगे चलकर इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा।

ब्रोकर्स के सामने एक अलग तरह की परेशानी भी खड़ी हो सकती है। मान लीजिए किसी ग्राहक ने UPI के जरिए अपने ब्रोकर के अकाउंट में पैसे जमा किए, लेकिन बाद में कोई शेयर नहीं खरीदा। ऐसी सूरत में भी ब्रोकर को MDR भरना पड़ सकता है। इससे यह सवाल उठता है कि ऐसे मामलों में यह अतिरिक्त खर्चा आखिर कौन उठाएगा।

NSE के सीईओ आशिष चौहान के मुताबिक, ब्रोकर्स और क्लाइंट्स को मिलकर इसका हल निकालना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन नए चार्जेस पर ब्रोकर्स और क्लाइंट्स कैसे रिएक्ट करते हैं, यह देखना अभी बाकी है।

अभी कोई अपडेट नहीं

खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे