मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

UPI पेमेंट पर MDR चार्ज: सुप्रीम कोर्ट ने रोक से किया इनकार, RBI-NPCI को नोटिस

15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए MDR नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया।

UPI पेमेंट पर MDR चार्ज: सुप्रीम कोर्ट ने रोक से किया इनकार, RBI-NPCI को नोटिस
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

UPI पेमेंट पर मर्चंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है। इस नए नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, और सोमवार को कोर्ट ने इस मामले में RBI और NPCI को नोटिस जारी किया। हालांकि कोर्ट ने नई MDR व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है, यानी 15 अक्टूबर से जो नया नियम लागू होना तय था, वह उसी तारीख से लागू हो जाएगा।

अब सवाल यह है कि इस चार्ज का बोझ आखिर किस पर पड़ेगा। नए नियम के मुताबिक, चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट UPI पेमेंट पर, जहां रकम 2,000 रुपये से ज्यादा होगी, वहां 0.4% MDR लिया जाएगा। 75,000 रुपये या उससे ज्यादा की पेमेंट पर यह चार्ज ज्यादा से ज्यादा 300 रुपये तक ही रहेगा। सबसे अहम बात यह है कि यह चार्ज ग्राहक से अलग से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि MDR की जिम्मेदारी व्यापारी की ही होगी।

वहीं 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट को इस नए ढांचे में MDR से पूरी तरह छूट दी गई है। पर्सन-टू-पर्सन UPI ट्रांसफर भी रकम चाहे जितनी भी हो, मुफ्त ही रहेगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से करीब 96% व्यापारी लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। छोटे कारोबारियों के लिए अलग से रियायत का भी प्रावधान किया गया है।

कुछ जरूरी और कम मुनाफे वाले सेक्टरों के लिए अलग-अलग दर तय किए गए हैं। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि निविष्ठाओं से जुड़ी 2,000 रुपये से ज्यादा की पेमेंट पर एक समान 5 रुपये MDR लगेगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्युरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलरों से जुड़ी पेमेंट पर 0.02% MDR लिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।

इस नई चौखट के खिलाफ वकील अंजन दत्ता ने जनहित याचिका दाखल की है। इस याचिका में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी हुए MDR ढांचे को चुनौती दी गई है। इसके अलावा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10ए में हुए संशोधन की संवैधानिक वैधता पर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट में इस मामले पर आगे सुनवाई होनी है, फिलहाल 15 अक्टूबर से नया MDR नियम तय समय पर ही लागू होगा।

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