यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाएंगे व्यापारी
यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर के विरोध में देश के कुछ व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' का आह्वान किया है।
यूपीआई से होने वाले लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। देश के कुछ व्यापारिक संगठनों ने इसके विरोध में 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का आह्वान किया है। यह शुल्क 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर के रूप में प्रस्तावित है।
इस दिन कई व्यापारी यूपीआई से भुगतान नहीं लेने और ग्राहकों से नकद में लेनदेन करने की तैयारी में हैं। विरोध जताने के लिए दुकानों पर लगे क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढंकने की भी तैयारी है।
बताया गया है कि सरकार 15 अक्टूबर से व्यापारियों के लिए 2,000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने जा रही है। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पी2पी लेनदेन और छोटे भुगतान पर यह शुल्क नहीं लगेगा। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इस शुल्क का सीधा असर कारोबारियों पर पड़ेगा।
नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर ने बताया कि यूपीआई पर एमडीआर का मुद्दा कुछ व्यापारियों की तरफ से उठाया गया है। चेंबर की वार्षिक आमसभा 30 सितंबर को होनी है। उसमें इस पर चर्चा की जाएगी और फिर फैसला लिया जाएगा।
नागपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कैलाश जोगानी ने कहा कि व्यापारी यूपीआई शुल्क का विरोध कर रहे हैं। उनके संगठन की तरफ से व्यापारियों से अपील की गई है कि वे 2 अक्टूबर को अपनी दुकानों के क्यूआर कोड पर काला कपड़ा ढंककर अपना विरोध दर्ज कराएं।
नागपुर चिल्लर किराना विक्रेता संघ के सचिव ज्ञानेश्वर रक्षक ने कहा कि यूपीआई पर शुल्क लगाने का विरोध जायज है। उनके मुताबिक आजकल खुले पैसे कम मिलते हैं, इसलिए यूपीआई व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए भुगतान का आसान तरीका बन गया है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का बोझ व्यापारियों पर डालना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यापारी अपनी जेब से यह शुल्क नहीं देना चाहेगा।
व्यापारियों के इस विरोध की वजह से 2 अक्टूबर को कई बाजारों में यूपीआई से भुगतान पर असर पड़ने की संभावना है।
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