उमरेड-करहांडला से निकला युवा बाघ पेंच पहुंचा, F-2 बाघिन के शावकों में से एक माना जा रहा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
उमरेड-कर्हांडला वन्यजीव अभयारण्य की मशहूर F-2 बाघिन के पांच शावकों में से एक माना जा रहा युवा नर बाघ पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली इलाके में पहुंच गया है। शुक्रवार की सफारी में पर्यटकों को उसका लंबा दीदार हुआ।
रामटेक: वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। उमरेड-कऱ्हांडला वन्यजीव अभयारण्य की मशहूर F-2 बाघिन के पांच शावकों में से एक माना जा रहा युवा नर बाघ पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली इलाके में पहुंच गया है।
अंदाजा है कि इस बाघ की उम्र तीन से चार साल के बीच है। वह उमरेड-कऱ्हांडला अभयारण्य के गोठणगांव जोन से निकला था। उसे अपने लिए अलग इलाका चाहिए था, और इसी तलाश में वह चलते-चलते पेंच के जंगल तक आ गया। अब वहां उसकी मौजूदगी दर्ज हो चुकी है।
शुक्रवार दोपहर की सफारी में आए पर्यटकों की किस्मत अच्छी रही, क्योंकि उन्हें इस युवा बाघ को काफी देर तक देखने का मौका मिला। जंगल के पास एक शिकार खाने के बाद बाघ कुछ देर पानी के गड्ढे में बैठकर आराम करता दिखा। फिर वह इलाके में घूमा और कई जगह उसने अपने इलाके की निशानदेही की।
बाघ की पहचान उसके शरीर पर बनी काली धारियों के पैटर्न से हुई। यह पैटर्न हर बाघ का अलग होता है। डेक्कन ड्रिफ्ट्स के वन्यजीव शोधकर्ता पीयूष अकरे और चोरबाहुली गेट के जंगल गाइड अजय सोनटक्के और अविनाश चौधरी ने धारियों का मिलान करके इस बाघ को पहचाना।
सफारी के दौरान बाघ की चाल-ढाल और उसके कुदरती बर्ताव की कई तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि घर छोड़कर निकल पड़ना बाघ की जिंदगी का कुदरती हिस्सा है। एक उम्र के बाद युवा बाघ अपनी मां का इलाका छोड़कर अपने लिए अलग ठिकाना ढूंढने निकलते हैं। खासकर नर बाघ अपना इलाका बनाने के लिए जंगलों के बीच लंबा सफर तय करते हैं।
उमरेड-कऱ्हांडला से पेंच तक इस युवा बाघ का पहुंचना बताता है कि जंगलों के बीच जुड़ाव और कुदरती वन्यजीव गलियारे कितने जरूरी हैं। इन्हीं की वजह से बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल जा पाते हैं और जिंदा रह पाते हैं।
उसके आने से पेंच टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव शोधकर्ताओं में उत्साह है।
रिपोर्टर: अजय मेहरकुले, रामटेक
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