वर्धा में रब्बी के लिए कृषि विभाग की सलाह, कम पानी वाली फसलें बोएं किसान
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वर्धा जिले में बारिश की कमी और घटते जलस्तर को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से रब्बी सीजन में कम पानी वाली, ज्यादा मुनाफे की फसलें चुनने को कहा है।
वर्धा जिले में इस बार बारिश कम हुई है, खेतों की नमी घट गई है और कुओं व बोरवेल का जलस्तर नीचे गया है। सिंचाई के लिए प्रोजेक्टों में जमा पानी भी देखना पड़ रहा है। इन हालात को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि रब्बी सीजन की फसल का प्लान बनाते वक्त यह सही अंदाजा लगा लें कि पानी की कितनी बारियां मिलेंगी। उसी के हिसाब से बुआई करें और बुआई का रकबा तय करें। विभाग का कहना है कि जो फसलें कम पानी में होती हैं और ज्यादा मुनाफा देती हैं, उन्हीं को पहले रखा जाए।
इस रब्बी सीजन में मौसम भले ही अनुकूल न हो, फिर भी किसानों को अच्छी पैदावार मिले, इसके लिए कृषि विभाग फसल नियोजन, सिंचाई प्रबंधन, बेहतर खेती के तरीकों और सरकारी योजनाओं के फायदों पर मार्गदर्शन दे रहा है। विभाग के मुताबिक सिंचाई के पानी की हर बूंद कीमती है। इसलिए जिन गांवों में पानी मिलने वाला है, वहां आखिरी किसान तक सिंचाई के नियोजन की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
जिले की काली और मध्यम जमीन के लिए चना, करडी, सरसों, अलसी, मसूर और रब्बी ज्वार की सलाह दी गई है। इन्हें चुनते वक्त जमीन का प्रकार, मौजूद नमी और सिंचाई की सुविधा देखनी चाहिए। करडी की जड़ें गहरी होती हैं, इसलिए यह सूखे को अपेक्षाकृत बर्दाश्त कर लेती है। चने में जमीन की बची हुई नमी का अच्छा इस्तेमाल हो जाता है। सरसों, अलसी और मसूर भी कम पानी की हालत में ठीक रह सकती हैं।
सूरजमुखी को तुलनात्मक रूप से ज्यादा सिंचाई चाहिए, इसलिए उसे पानी की उपलब्धता देखकर ही चुनें। फसल की नाजुक अवस्था में पानी की कमी न पड़े, इसके लिए किसान ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई का इस्तेमाल करें। जरूरत पड़े तो कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के हिसाब से फसल की अवस्था के मुताबिक उपाय किए जाएं। पोटैशियम नाइट्रेट या एंटी-ट्रांसपिरेंट जैसी चीजें उसी फसल के लिए सिफारिश, सही मात्रा और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही इस्तेमाल करनी चाहिए।
निम्न वर्धा, बोर और पौथरा सिंचाई प्रोजेक्टों के लाभ क्षेत्र में रब्बी के लिए पानी की उपलब्धता देखकर बारियों का नियोजन किया जा रहा है। सिंचाई का कार्यक्रम सिंचाई विभाग और प्रोजेक्ट सलाहकार समिति के फैसले से तय होगा। प्रस्ताव यह है कि बुआई और फसल की शुरुआती बढ़त के लिए आम तौर पर नवंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में पहली बारी मिले। फसल की जरूरत के हिसाब से दिसंबर के आखिर या जनवरी के पहले हफ्ते में दूसरी बारी देने की योजना है।
बीज मिनीकिट योजना के तहत रब्बी में ज्वार और मसूर के मिनीकिट बांटने का नियोजन है। उपलब्धता के हिसाब से ज्वार के 1,000 और मसूर के 700 मिनीकिट दिए जाएंगे। हर किसान को एक मिनीकिट मिलेगा, जिसमें ज्वार का 4 किलो और मसूर का 8 किलो बीज होगा। जिन किसानों ने महाडीबीटी पोर्टल पर अर्जी दी थी और जिनका चयन हो गया है, वे अपने तालुका कृषि अधिकारी कार्यालय से संपर्क करें।
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