बुलढाणा में पानी और चारे की किल्लत का अंदेशा, केंद्रीय राज्यमंत्री जाधव ने दी अभी से तैयारी की हिदायत
केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने बुलढाणा में समीक्षा बैठक लेकर प्रशासन और सभी विभागों को चारा लगाने, जलसंधारण के काम तेज करने और चारा छावनी की तैयारी रखने को कहा।
बुलढाणा जिले में आगे पानी और चारे की किल्लत हो सकती है। इसे देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा है कि जानवरों के चारे का इंतजाम अभी से करना जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि केंद्र की मदद से चलने वाली 'जी रामजी' योजना के जरिए किसानों को फायदा देकर जिले में बड़े पैमाने पर चारा लगवाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए प्रशासन समेत सभी को मिलकर काम करना होगा।
जाधव कलेक्टर ऑफिस में पानी की किल्लत और चारा व्यवस्था पर हुई समीक्षा बैठक में बोल रहे थे। बैठक में विधायक श्वेता महाले, कलेक्टर डॉ. प्रवीणकुमार देवरे और पूर्व विधायक संजय रायमुलकर मौजूद थे। जल संरक्षण, मृदा और जल संरक्षण, कृषि और पशुपालन विभाग के अफसर भी आए थे। अलग-अलग विभागों के कामों का जायजा लिया गया और आने वाले दिनों में पानी और चारे की किल्लत से निपटने के लिए बारीकी से प्लानिंग करने को कहा गया।
पशुपालन विभाग की तरफ से किसानों को चारा लगाने के लिए बीज बांटे जा चुके हैं। जाधव ने कहा कि इन बीजों की बुआई सच में हुई या नहीं, इसकी जानकारी कृषि सहायक और पटवारी के जरिए जुटाई जाए। जिन इलाकों में चारा लगा है, उसकी तहसील के हिसाब से रिपोर्ट आठ दिन में जमा करनी होगी। गांव के स्तर पर चारा लगाने की योजना बनाई जाए, ताकि आगे किल्लत की नौबत न आए।
उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन में बारिश कम रही और उसका असर फसलों की पैदावार पर पड़ा है। इसलिए चारे के इंतजाम को पहली प्राथमिकता देनी होगी। खरीफ की कटाई के बाद खेतों में सोयाबीन और अरहर का भूसा तथा दूसरी फसलों के अवशेष बच जाते हैं। इन्हें जमा करके जानवरों के खाने में इस्तेमाल किया जाए। पशुपालकों को समझाया जाए कि मौजूद चारा किफायत से कैसे बरतें। चारे को बचाकर रखना, साइलेज बनाना, चारे का सही तरीके से भंडारण और फसल अवशेषों की पौष्टिकता बढ़ाने जैसी बातों पर ट्रेनिंग और जागरूकता का काम भी किया जाए।
जाधव ने कहा कि जानवरों की संख्या और चारे के मौजूदा स्टॉक को देखकर आगे की जरूरत के हिसाब से योजना बने। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे रबी सीजन में ज्वार और दूसरी चारा फसलें लगाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जानवरों के लिए चारा शिविर शुरू करने की नौबत आ सकती है। इसलिए प्रशासन जरूरी तैयारी अभी से कर ले। किसानों के लिए चल रहे उपायों, अलग-अलग विभागों की योजनाओं और लोगों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा गया।
पानी की किल्लत से निपटने के लिए जाधव ने कहा कि तहसील स्तर पर अलग-अलग विभाग मिलकर जल संरक्षण के काम हाथ में लें। नदियों को गहरा करना, तालाबों से गाद निकालना, नालों को गहरा करना, खेतों तक जाने वाली सड़कें बनाना, खेत तालाब बनाना और ऊपरी हिस्से से तलहटी तक जल संरक्षण के काम, इन सबकी बारीक प्लानिंग हो। मौजूद योजनाओं से ये काम असरदार तरीके से कराए जाएं और बारिश का ज्यादा से ज्यादा पानी रोककर जमीन में उतारने पर जोर दिया जाए, यह भी उन्होंने कहा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।