बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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19:54 IST

चंद्रपुर में सूखे से निपटने के लिए 28,688 कामों की योजना, पानी बचाने और रोज़गार पर ज़ोर

चंद्रपुर जिला प्रशासन ने सूखे की हालत को देखते हुए जलसंधारण और मजदूरों के रोजगार का बड़ा प्लान बनाया है।

चंद्रपुर में सूखे से निपटने के लिए 28,688 कामों की योजना, पानी बचाने और रोज़गार पर ज़ोर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर: इस खरीफ सीज़न में बारिश ने जिले को चकमा दिया और सूखे जैसे हालात बन गए। इससे निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। गांवों के किसानों और खेतमजदूरों को फौरन काम देने के साथ आगे की पानी की किल्लत का पक्का इलाज करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।

जिलाधिकारी वसुमना पंत की अगुवाई में जल संरक्षण, सिंचाई क्षमता बढ़ाने, पेड़ लगाने और चारा पैदा करने जैसे कामों की रफ्तार बढ़ाई जा रही है। 'विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी अभियान (वीबीजी-राम-जी)' के तहत कुल 28 हजार 688 तरह के विकास कामों की योजना तैयार की गई है।

साल 2026-27 की इस योजना में गांवों में पानी का स्टॉक बढ़ाने और खेती को सहारा देने के लिए जल संरक्षण के कामों पर खास जोर है। इसमें 899 मामा तालाबों का गहरीकरण, 1620 बोडी का गहरीकरण, 2375 नालों का गहरीकरण और 2438 खेत तालाब शामिल हैं। इसके अलावा 834 बांधों का निर्माण और गाद निकालने का काम, 16 हजार 356 सिंचाई कुएं, 189 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और 62 लगातार समतल खाइयां भी प्लान में हैं।

ज़मीन में नमी बनाए रखने के लिए 2456 पेड़ लगाने, 712 फूलों की खेती और 747 घास लगाने के काम भी किए जाएंगे। इन सब कामों से जिले में भूजल का स्तर बढ़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

भूजल को दोबारा भरने के लिए प्रशासन ने 825 ग्राम पंचायतों में हर एक में 100 के हिसाब से कुल 82 हजार 500 'जलतारा' बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक 'युक्तधारा' प्रणाली से अब तक 17 हजार 541 काम प्रस्तावित किए जा चुके हैं।

पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए जिला खनिज विकास निधि की मदद से खास वृक्षारोपण अभियान भी चल रहा है। इसमें 45 ग्राम पंचायतों में 'स्वस्तिक पैटर्न' के हिसाब से और 51 ग्राम पंचायतों में फलों के बाग लगाकर कुल 66 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।

सूखे के दौरान गांव के किसी भी मजदूर को बिना काम के न बैठना पड़े, इसके लिए प्रशासन ने 10 हजार 237 कामों का शेल्फ तैयार रखा है। फिलहाल जिले में 1495 अलग-अलग काम चालू हैं, जिन पर 3 हजार 957 मजदूर लगे हैं।

उपजिलाधिकारी (मनरेगा) शुभम दांडेकर ने भरोसा जताया है कि यह पहल सिर्फ अस्थायी रोजगार तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक आगे पानी की किल्लत की तीव्रता घटाने, खेती की पैदावार बढ़ाने और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज़ से यह बहुत अहम साबित होगी।

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