सूखे की मार से गन्ना कमजोर, आने वाले महीनों में चीनी के दाम चढ़ने का अंदेशा
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महाराष्ट्र और कर्नाटक में पानी की कमी से गन्ने की फसल प्रभावित, सीजन 2026-27 में उत्पादन 270 से 290 लाख टन रहने का अनुमान।
चीनी सीजन 2026-27 में देश का उत्पादन घट सकता है, और इसी वजह से आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चीनी के दाम चढ़ सकते हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे के गंभीर हालात हैं। पानी की कमी से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ने वाला है।
यह अंदेशा कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष और ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर ने जताया है। ठक्कर के अनुसार महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई इलाकों में सूखे और सिंचाई के पानी की कमी के कारण गन्ने की फसल पर असर पड़ा है।
उद्योग के अनुमानों के मुताबिक इस सीजन में देश का चीनी उत्पादन 270 से 290 लाख टन के बीच रह सकता है। कुछ आकलनों में आशंका है कि यह घटकर 270 लाख टन तक सिमट जाए। पिछले सीजन की तुलना में यह गिरावट बाजार में सप्लाई और कीमतों का संतुलन बिगाड़ सकती है।
पानी की किल्लत मराठवाड़ा में गंभीर है। पश्चिमी महाराष्ट्र के सांगली और कोल्हापुर समेत कई जिलों में भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी यही हाल है। इसका असर मौजूदा गन्ना फसल पर तो है ही, अगले सीजन की खेती पर भी पड़ सकता है, क्योंकि पानी की कमी के चलते किसान गन्ने की जगह मक्का और सोयाबीन जैसी दूसरी फसलों की तरफ जा सकते हैं।
गन्ने की कम उपलब्धता के साथ चीनी की रिकवरी दर में गिरावट और गुड़ उद्योग की बढ़ती मांग भी उत्पादन पर असर डाल रही है। कोल्हापुर के आसपास कुछ किसान बेहतर भाव मिलने की वजह से चीनी मिलों की जगह गुड़ बनाने वालों को गन्ना बेच रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 28 अक्टूबर तक 98 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी। राज्य में लगभग 55 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी और रिकवरी दर 7.27 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
देश में चीनी की घरेलू खपत 285 से 290 लाख टन रहने का अनुमान है। अगर उत्पादन 270 लाख टन के आसपास रहा, तो मांग और सप्लाई के बीच का फासला बढ़ सकता है। ऐसे में आयात की जरूरत भी पड़ सकती है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चीनी का औसत खुदरा भाव 58.87 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि अलग-अलग बाजारों में दाम 45 से 76 रुपये प्रति किलो के बीच दर्ज किए गए। ठक्कर का कहना है कि आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता, गन्ने की रिकवरी और मिलों की पेराई की रफ्तार ही चीनी के दामों की दिशा तय करेगी।
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