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1 नवंबर से सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस से बना इथेनॉल नहीं खरीदेंगी

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद बंद करने का फैसला किया है।

1 नवंबर से सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस से बना इथेनॉल नहीं खरीदेंगी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सरकारी तेल विपणन कंपनियां 1 नवंबर से गन्ने का रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बना इथेनॉल नहीं खरीदेंगी। सरकार के इस फैसले से चीनी उद्योग में हलचल मच गई है। देशभर में इथेनॉल को लेकर लोगों में काफी नाराजगी दिख रही है। कहा जा रहा है कि इथेनॉल की वजह से गाड़ियों में कई दिक्कतें आ रही हैं।

यह आदेश भारत में नए आपूर्ति वर्ष से लागू होगा, जो 1 नवंबर से शुरू हो रहा है। कहा जा रहा है कि इससे बाजार में चीनी के दाम काबू में रखने में मदद मिल सकती है। इस साल कम बारिश का असर गन्ने की पैदावार पर पड़ा है, जिससे चीनी की कीमतों में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 11 अब्ज लीटर इथेनॉल खरीदने का संयुक्त टेंडर निकाला है। ताजा सरकारी गाइडलाइंस का हवाला देते हुए नए टेंडर दस्तावेजों में साफ लिखा गया है कि गन्ने के रस, चीनी की चाशनी या बी-हेवी शीरे से सीधे बने इथेनॉल की कोई बोली मंजूर नहीं की जाएगी। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि कारखानों को मिलने वाला ज्यादातर गन्ना अब सिर्फ चीनी बनाने में इस्तेमाल होगा।

भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरे नंबर का चीनी उत्पादक देश है। फिर भी देश में चीनी के दाम बहुत ज्यादा चढ़ गए, जिसका सीधा बोझ आम लोगों की जेब पर पड़ा। इस साल मानसून की बारिश भी बहुत अनियमित रही। ताकतवर एल नीनो की वजह से प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में सूखे जैसे हालात बन गए, जिसका गन्ने की पैदावार और उसके रेट पर गंभीर असर पड़ा। पैदावार घटने के डर से देश के बाजार में चीनी के दाम काबू में रखने के लिए सरकार का यह कदम अहम माना जा रहा है।

गन्ने से इथेनॉल बनाने पर लगी इस रोक का असर पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने की भारत की योजना पर नहीं पड़ेगा। तेल कंपनियों ने इथेनॉल की आपूर्ति के लिए दूसरे रास्ते खुले रखे हैं। नए टेंडर के तहत सप्लायर अब सी-हेवी शीरे, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास पड़े अतिरिक्त चावल, खराब हो चुके अनाज, मक्का और राष्ट्रीय जैवईंधन नीति के तहत मंजूर दूसरे कृषि अवशेषों से इथेनॉल बना सकेंगे।

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