रेणुकास्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने का फैसला रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी की याचिका खारिज कर दी। आरोपी नंबर 14 प्रदोष एस. राव सरकारी गवाह बना रहेगा।
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कन्नड अभिनेता दर्शन को रेणुकास्वामी हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने आरोपी नंबर 14 प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने का कर्नाटक हाई कोर्ट और निचली अदालत का फैसला जस का तस रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने के फैसले में दखल देने की कोई वजह नहीं है। बेंच का कहना था कि याचिका में दम नहीं है, इसलिए उसे खारिज किया जा रहा है।
यह याचिका दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी ने दायर की थी। दर्शन के वकीलों ने दलील दी थी कि प्रदोष को सरकारी गवाह बनाते वक्त तय प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का ठीक से पालन नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष को प्रदोष से जिरह करने का मौका मिलेगा। यानी उसके बयान की सच्चाई और भरोसेमंद होने पर जिरह के जरिए सवाल उठाए जा सकते हैं।
इस बीच, बुधवार को बेंगलुरु की निचली अदालत में प्रदोष का बयान सरकारी गवाह के तौर पर दर्ज किया गया। अब उसकी गवाही मुकदमे के सबूतों का हिस्सा होगी। अगली सुनवाई में बचाव पक्ष उससे जिरह कर सकेगा।
प्रदोष को शुरू में इस मामले में आरोपी नंबर 14 बनाया गया था। इसके बाद निचली अदालत ने उसे सरकारी गवाह बनने की इजाजत दे दी। इस फैसले को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि रेणुकास्वामी की मां अपने पहले दिए बयान से पीछे हट गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में कोर्ट ने कहा कि सरकारी गवाह की भूमिका अहम हो सकती है।
रेणुकास्वामी हत्या का मामला जून 2024 में सामने आया था। बेंगलुरु में रेणुकास्वामी की लाश मिलने के बाद जांच शुरू हुई। इस मामले में अभिनेता दर्शन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सभी आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने का फैसला कायम रखा है, इसलिए अब मुकदमे में उसके बयान की अहमियत बढ़ गई है। फिर भी उसकी गवाही कितनी भरोसेमंद है, यह परखने का हक बचाव पक्ष के पास बना रहेगा।