मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

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02:07 IST

त्योहारों से पहले चावल, दालें और गुड़ महंगे, रसोई का बजट बिगड़ने के आसार

कर्नाटक में कम बारिश और जलाशयों के घटते पानी का असर अनाज की खेती पर पड़ा है, दशहरा और दिवाली से पहले राशन का खर्च बढ़ सकता है।

त्योहारों से पहले चावल, दालें और गुड़ महंगे, रसोई का बजट बिगड़ने के आसार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दशहरा और दिवाली करीब आ गई हैं और घरों में पकवान और मिठाइयों की तैयारी शुरू हो चुकी है। लेकिन इस बार त्योहार की खरीदारी रसोई के बजट पर भारी पड़ने वाली है। चावल, दालें, रागी, गुड़ और दूसरे जरूरी अनाज के दाम बढ़ रहे हैं। इसी वजह से आम परिवारों को दशहरा और दिवाली से पहले किराने के सामान पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि कर्नाटक में बारिश कम हुई है और जलाशयों में पानी का स्तर नीचे जा रहा है। इससे अनाज की खेती पर असर पड़ा और उसका नतीजा बाजार में चावल और खाने-पीने की दूसरी चीजों के दामों में दिख रहा है। खबरों के मुताबिक पिछले तीन महीनों में चावल की कई किस्में 25 से 30 प्रतिशत महंगी हो गई हैं। साथ ही यह भी सामने आ रहा है कि किराने के सामान के दाम पिछले साल की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत बढ़े हैं।

चावल भारतीय घरों की रोज की जरूरत है, इसलिए उसके दाम बढ़ने का सीधा असर महीने के घरेलू खर्च पर होता है। कर्नाटक के बाजारों में चावल की अलग-अलग किस्में महंगी हुई हैं। मिली जानकारी के अनुसार जो चावल पहले 50 से 60 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 70 से 90 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। रागी भी महंगी हुई है। पिछले साल वह 35 से 40 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, अब 55 से 60 रुपये प्रति किलो मिल रही है। गुड़ करीब 50 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 80 से 85 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

कर्नाटक के थोक बाजार में चावल और दालों की अलग-अलग किस्मों के भाव ऊपर-नीचे हो रहे हैं। रिपोर्ट में दिए गए एपीएमसी बाजार भाव प्रति किलो इस तरह हैं। सोना स्टीम्ड राइस (उबला चावल) 72 से 75 रुपये, सोना मसूरी चावल 80 रुपये और कोलम चावल 90 से 95 रुपये है। इडली चावल 46 रुपये और डोसा चावल 35 से 40 रुपये प्रति किलो है।

दालों में तूर दाल 130 से 160 रुपये प्रति किलो है। चना दाल के दो भाव दिए गए हैं, 95 से 100 रुपये और 90 से 95 रुपये। हरे मूंग 110 से 120 रुपये और उड़द दाल 100 से 165 रुपये प्रति किलो बताई गई है।

दाम बढ़ने की मुख्य वजह कम बारिश और पानी की किल्लत बताई जा रही है। मानसून में बारिश की कमी और जलाशयों के नीचे स्तर से धान, रागी, ज्वार और दूसरी फसलों की खेती पर असर पड़ा है। जब फसल की पैदावार पर असर पड़ता है, तो बाजार में अनाज की सप्लाई कम पड़ने का खतरा बढ़ जाता है, और इससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। त्योहारों के दिनों में खाने-पीने की चीजों की मांग भी बढ़ती है, इसलिए बढ़े हुए दामों की मार परिवारों को ज्यादा तेज महसूस होती है।

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