दिवाली का एक दिन किसानों के गांव में गुज़ारें मंत्री, मुख्यमंत्री फडणवीस की अपील
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों से कहा कि दिवाली का एक दिन किसी गांव में किसानों के साथ बिताएं। उन्होंने कहा कि वे खुद नागपुर जिले के एक गांव में जाएंगे।
नागपुर: सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पूरी कैबिनेट से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि हर मंत्री इस दिवाली पर कम से कम एक दिन किसी गांव में जाए और वहां किसान परिवारों के बीच त्योहार मनाए। फडणवीस ने यह भी कहा कि वे खुद नागपुर जिले के एक गांव में एक दिन बिताएंगे।
मुख्यमंत्री 5 तारीख को नागपुर में अपने सरकारी निवास रामगिरी पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे, तभी उन्होंने यह बात रखी। उस वक्त वित्त और नियोजन राज्यमंत्री आशीष जायसवाल, विधायक संजय भेंडे, विधायक परिणय फुके और विधायक कृष्णा खोपड़े वहां मौजूद थे। शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी भी इस मौके पर हाज़िर थे।
फडणवीस के मुताबिक राज्य के किसान इस वक्त सूखे जैसे हालात से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अल नीनो की वजह से महाराष्ट्र को भीषण सूखे का सामना करना पड़ रहा है और गांव के इलाकों में यह संकट सबसे भारी है। फिर भी उनका भरोसा है कि सब मिलकर इस मुसीबत से निकल आएंगे। सरकार की पहली प्राथमिकता पीने के पानी का इंतज़ाम और मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था है, और उसी हिसाब से काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे वक्त में किसानों को सहारा देना और डटकर उनके साथ खड़े रहना समाज के हर तबके की ज़िम्मेदारी बनती है। सरकार अपनी तरफ से मदद की कोशिश कर रही है, और कई सामाजिक संस्थाएं, संगठन और आम लोग भी आगे आ रहे हैं। सरकार चाहती है कि इन सब कोशिशों को बड़ा रूप दिया जाए, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा किसानों तक मदद पहुंचे। जो संस्थाएं और लोग यह काम कर रहे हैं, उन्हें सरकार बढ़ावा देगी।
फडणवीस ने बताया कि इसी मुद्दे पर एक दिन पहले राज्य के सभी मंत्रियों से बैठक में बात हुई। बैठक में सोचा गया कि किसानों की दिक्कतें क्या हैं, उन्हें किस तरह के सहयोग की ज़रूरत है और मदद को ज़्यादा असरदार ढंग से कैसे पहुंचाया जाए। उनका कहना था कि मदद सिर्फ सरकारी दफ्तरों से नहीं, समाज की तरफ से भी मिलनी चाहिए।
किसान को उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा सहारा बताया। खेती की परेशानी का असर केवल किसान के घर तक नहीं रुकता, पूरे गांव की कमाई और कारोबार पर भी पड़ता है। इसीलिए बुरे वक्त में किसानों की मदद करना, उनके साथ खड़े रहना और उन्हें दोबारा पैरों पर खड़ा करने के लिए मिलकर जुटना ज़रूरी है।
दिवाली की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खुशी, जोश और अपनापन का त्योहार है, पर किसानों के लिए इस बार हालात कठिन हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि त्योहार की रौनक में किसान परिवार भी बराबर शरीक हों और उन्हें लगे कि वे अकेले नहीं हैं।
मंत्रियों से उनकी उम्मीद साफ है। वे गांव जाएं, किसान परिवारों से बैठकर बात करें, उनका हाल पूछें और उनकी तकलीफ़ समझें। फडणवीस के मुताबिक किसानों के सुख-दुख में साथ रहना, उन्हें हौसला देना और उनके सवालों को संवेदनशीलता से सुनना, इस पहल को अहम बनाता है। उन्होंने इसे एक बड़ा सामाजिक संदेश भी बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाएं और नागरिक एक साथ ज़ोर लगाएं तो मदद का दायरा बहुत बढ़ सकता है। इसी सोच से उन्होंने मंत्रियों से दिवाली का एक दिन किसानों के नाम करने को कहा। अपने बारे में फडणवीस ने कहा, "मैं भी नागपुर जिले के एक गांव में एक दिन जाऊंगा।" उनकी अपील है कि सूखे को सब मिलकर हराएं।
इसी मौके पर सूचना और जनसंपर्क विभाग के नागपुर दफ्तर के अफसरों और कर्मचारियों ने सूखा पीड़ित किसानों की मदद के लिए अपनी तरफ से रकम जमा की थी। विभाग की निदेशक के हाथों यह चेक मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
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