शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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तटकरे बोले: अजित पवार होते तो दोनों राष्ट्रवादी साथ आतीं, 12 फरवरी की तारीख तय होती

तटकरे बोले: अजित पवार होते तो दोनों राष्ट्रवादी साथ आतीं, 12 फरवरी की तारीख तय होती
अजित पवार | फाइल फोटो | Deccan Chronicle
सियासत PT24 टीम

राष्ट्रवादी काँग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि अजित पवार होते तो दोनों पार्टियां आज साथ दिखतीं। शरद पवार गुट के शशिकांत शिंदे ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।

राज्य की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है और सत्ताधारी और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर खींचतान चल रही है। इसी बीच राष्ट्रवादी काँग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे के एक बयान ने दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के विलीनीकरण की चर्चा को फिर हवा दे दी है।

तटकरे ने कहा, "अजित पवार हयात होते तो दोनों राष्ट्रवादी काँग्रेस आज एक साथ दिखतीं।" उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल मची है।

तटकरे ने साफ किया कि इस वक्त दोनों राष्ट्रवादी काँग्रेस के विलीनीकरण को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही। उनके मुताबिक अजित पवार होते तो तस्वीर अलग होती। अजित पवार के निधन के बाद विलीनीकरण की चर्चा पीछे चली गई। तटकरे ने कहा कि अजितदादा होते तो दोनों पार्टियां एक होती दिखाई देतीं।

तटकरे ने एक अहम दावा भी किया। उनके मुताबिक इस मामले में 12 फरवरी की तारीख भी तय हो गई होती। तटकरे ने बताया कि वे अजित पवार के करीबी साथी थे, इसलिए अजित पवार ने यह बात उन्हें बताई थी।

इस बीच राष्ट्रवादी के नेता प्रफुल पटेल ने गुरुवार, 5 नवंबर को अस्पताल जाकर शरद पवार से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद पटेल ने कहा था कि राजनीतिक तौर पर हम दूर जरूर हैं, पर मन से दूर नहीं हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या दोनों राष्ट्रवादी फिर एक होंगी।

तटकरे के बयान पर शरद पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने भी प्रतिक्रिया दी। शिंदे ने कहा कि अजित पवार के रहते दोनों पार्टियों के विलीनीकरण की चर्चा चल रही थी। उनके मुताबिक वे लोग इस बारे में पहले से बोल रहे थे, लेकिन तब उनके बयानों को ज्यादा अहमियत नहीं दी जाती थी। शिंदे ने कहा कि अब खुद तटकरे ने यह बात कही है, इसलिए हकीकत सामने आ गई है।

शिंदे ने यह भी कहा कि दोनों राष्ट्रवादी साथ आई होतीं तो जिला परिषद और महानगर पालिका चुनावों की राजनीतिक तस्वीर अलग दिखती।

कुल मिलाकर, अजित पवार के निधन के बाद अटका हुआ विलीनीकरण का मुद्दा अब फिर चर्चा में है। हालांकि फिलहाल दोनों पार्टियों के साथ आने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला या बातचीत चल रही हो, ऐसा साफ नहीं हुआ है।

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