शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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रणजीव पुरी बने मिशिगन हाउस के स्पीकर, इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकन

रणजीव पुरी बने मिशिगन हाउस के स्पीकर, इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

42 साल के रणजीव पुरी पंजाबी सिख परिवार में अमेरिका में जन्मे। वे मिशिगन प्रतिनिधिसभा के अध्यक्ष चुने गए हैं।

अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की जगह लगातार मजबूत होती दिख रही है। इसी कड़ी में एक और बड़ी बात जुड़ गई है। भारतीय-अमेरिकन नेता रणजीव पुरी को मिशिगन राज्य की प्रतिनिधिसभा यानी मिशिगन हाउस का अध्यक्ष (स्पीकर) चुना गया है। इस अहम पद पर पहुंचने वाले वे पहले भारतीय-अमेरिकन हैं।

मिशिगन जैसे अहम राज्य की सत्ता की राजनीति में भारतीय मूल के नेता की यह जीत सिर्फ अमेरिका के भारतीय समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए बड़े गर्व की बात मानी जा रही है। चुनाव के बाद रणजीव पुरी को दुनियाभर से बधाइयां मिल रही हैं। वे अब सदन के सबसे ऊंचे आसन पर बैठकर पूरी प्रतिनिधिसभा की कार्यवाही संभालेंगे।

रणजीव पुरी की उम्र 42 साल है। उनका जन्म अमेरिका में एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ। उनके माता-पिता बेहतर भविष्य और मौकों की तलाश में भारत से अमेरिका आकर बसे थे। इस बड़ी कामयाबी पर रणजीव ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट शेयर की। उन्होंने लिखा, "मेरे माता-पिता जब पंजाब छोड़कर अमेरिका आए थे, तब उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका बेटा एक दिन मिशिगन प्रतिनिधिसभा का अध्यक्ष बनकर उसकी अगुवाई करेगा।"

अपने साथियों के भरोसे के लिए उन्होंने आभार जताया। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव के दौरान मिशिगन की जनता से किए गए सभी वादे पूरे करने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। राज्य के विकास को रफ्तार देने के लिए वे सीनेट के बहुमत नेता डैरिन कैमिलरी और नवनिर्वाचित गवर्नर जॉसलिन बेन्सन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को उत्सुक हैं।

रणजीव पुरी का राजनीतिक सफर कदम दर कदम आगे बढ़ा है। उन्होंने पहली बार 2020 में मिशिगन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीता। उस जीत के साथ वे मिशिगन विधानमंडल के इतिहास में चुने जाने वाले पहले सिख-अमेरिकन प्रतिनिधि बने थे। इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के मुद्दे जोरदार तरीके से उठाए और उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।

काम को देखते हुए पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपनी शुरू कीं। 2025 में उन्हें हाउस में डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता (Democratic Leader) नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने पार्टी के भीतर अच्छा तालमेल बैठाया। फिलहाल वे तीसरी बार मिशिगन प्रतिनिधिसभा में जनप्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे हैं। अब सीधे अध्यक्ष चुने जाने से उनके राजनीतिक सफर का नया अध्याय शुरू हुआ है।

उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि अचानक नहीं बनी। अमेरिकी राजनीति में उनकी दिलचस्पी शुरू से दिखती थी। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2008 और 2012 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार में सक्रिय हिस्सा लिया था। इन अभियानों में काम करते हुए उन्हें अमेरिकी चुनाव की रणनीति, जनता से बात करने के तरीके और राजनीतिक संगठन की गहरी समझ मिली।

राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया। उन्होंने शिकागो यूनिवर्सिटी के जाने-माने बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस (Booth School of Business) से एमबीए की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद वे मिशिगन लौटे और वाहन उद्योग (Auto Industry) में वित्तीय और कारोबारी सलाहकार के तौर पर कुछ साल काम किया। कॉर्पोरेट सेक्टर के इस अनुभव और ओबामा की मुहिम के राजनीतिक अनुभव को जोड़कर उन्होंने राज्य स्तर की राजनीति में अपनी अलग और मजबूत जगह बनाई।

अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। चाहे उपराष्ट्रपति का पद हो, अलग-अलग राज्यों के गवर्नर का या प्रांतीय सदनों में नुमाइंदगी का, भारतीय मूल के नेता हर जगह अपनी छाप छोड़ रहे हैं। मिशिगन जैसे औद्योगिक और राजनीतिक रूप से अहम राज्य में रणजीव पुरी का यह मुकाम दुनिया के स्तर पर भारतीय मूल के लोगों के बढ़ते नेतृत्व की निशानी माना जा रहा है।

भारतीय समुदाय के स्थानीय नेताओं और कई संगठनों ने रणजीव की इस जीत पर खुशी जताई है। इससे मिशिगन के भारतीय और सिख समुदाय को नया हौसला मिला है, और अमेरिका में बसी नई पीढ़ी को भी ऊंचे राजनीतिक लक्ष्य रखने की नई ऊर्जा मिली है।

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