सीताबर्डी फ्लाईओवर के रहाटे चौक वाले छोर पर 150 मीटर में तीन जोखिम भरी जगहें
नागपुर के सीताबर्डी फ्लाईओवर से रहाटे चौक की ओर उतरते हिस्से में सड़क की तीन खामियां चालकों के लिए खतरा बनी हुई हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर के सीताबर्डी फ्लाईओवर पर रहाटे चौक वाले छोर की तरफ उतरते हुए सिर्फ 150 मीटर के हिस्से में तीन ऐसी जगहें हैं, जो आए दिन वाहन चालकों की जान जोखिम में डाल रही हैं। ये तीनों जगहें एक्सीडेंट स्पॉट मानी जा रही हैं।
पहली जगह वहां है, जहां लैंडिंग की ढलान शुरू होती है। यहां डामर की एक ऊंची परत बनी है, जो स्पीड ब्रेकर की तरह वाहनों को अचानक उछाल देती है। अगर चालक का स्टीयरिंग पर ठीक से कंट्रोल न हो तो उछाल इतनी ज्यादा होती है कि गाड़ी लड़खड़ा जाती है। स्टीयरिंग पर नियंत्रण खोना यहां तय माना जा रहा है।
इस परत की वजह से टक्कर का डर भी रहता है। अगर ठीक सामने कोई वाहन चल रहा हो और उसने अचानक ब्रेक लगा दिया, तो पीछे से आ रहे वाहन का भिड़ना तय है। वाहन तेज हो या धीमा, दो गाड़ियों के बीच सही दूरी न हो तो यह परत भिड़ंत करवा ही देती है। सवाल यह है कि इस परत को आज तक फ्लाईओवर की सतह के बराबर क्यों नहीं किया गया।
दूसरी जगह इसके ठीक आगे है, जहां करीब 40 फीट लंबा डिवाइडर आता है। यह डिवाइडर फ्लाईओवर के रैंप को अप और डाउन, यानी दो हिस्सों में बांटता है। रहाटे चौक की ओर आते समय डिवाइडर शुरू होते ही चालकों को थोड़ा बायीं ओर मुड़ना पड़ता है।
ऐसे में अगर बगल में कोई चारपहिया या दोपहिया वाहन चल रहा हो, तो थोड़ी देर के लिए जान हलक में आ जाती है, क्योंकि बायीं तरफ मेटल डिवाइडर दिखाई देता है। यहां लेन अचानक संकरी महसूस होती है और वाहन के मेटल बैरियर से टकराने की स्थिति बनती है। डिवाइडर के कोने पर वाहन आए दिन टकराते रहते हैं।
तीसरी जगह सीमेंट रोड और डामर रोड का जोड़ है। हाल ही में फ्लाईओवर के दोनों ओर जनता चौक और रहाटे चौक के बीच सीमेंटीकरण किया गया। इसकी बनावट ऐसी है कि फ्लाईओवर की लैंडिंग का डामर रोड जहां सीमेंट रोड से मिलता है, वहां सीमेंट का ऊंचा स्पीड ब्रेकर जैसा ढांचा दिखता है।
इस जोड़ पर वाहन धीमे हों तो पीछे से टक्कर का डर रहता है और तेज हों तो भारी उछाल तय है। यानी एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई जैसी हालत है। यह जोड़ भी वाहनों को हवा में उछाल देता है।
इन खामियों का असर जाम के रूप में भी दिखता है। यहां मामूली टक्कर भी मीलों लंबे भीषण जाम की वजह बन जाती है। रहाटे चौक पर लगा जाम फ्लाईओवर के आधे हिस्से तक पहुंच जाता है। दो वाहनों की भिड़ंत के वक्त भी यही हाल होता है, और ऐसा जाम सुबह से देर शाम तक कई बार दिखता है।
हैरानी की बात है कि संबंधित विभागों को ये कमियां आम शहरी और वाहन चालकों की परेशानी के तौर पर नजर नहीं आ रहीं। सुधार के लिए वे तैयार नहीं दिखते। सवाल यही है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है।
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