सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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नागपुर के बाजारों में त्योहारी जाम, बैरिकेडिंग पर सवाल, स्थायी ट्रैफिक प्लान की मांग

त्योहारों से पहले नागपुर के बड़े बाजारों में जाम, पार्किंग और रास्ते बंद करने को लेकर नागरिक स्थायी योजना मांग रहे हैं।

नागपुर के बाजारों में त्योहारी जाम, बैरिकेडिंग पर सवाल, स्थायी ट्रैफिक प्लान की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

त्योहार का मौसम शुरू होते ही नागपुर के बाजारों में खरीदारी की रौनक बढ़ जाती है, मगर उसी के साथ सड़कों पर जाम भी गहराने लगता है। बाजारों की तरफ जाने वाले रास्तों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगती हैं, हॉर्न का शोर रहता है और पार्किंग बेतरतीब हो जाती है। दिवाली की खरीदारी से पहले ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और उसकी प्लानिंग पर सवाल उठने लगे हैं।

सीताबर्डी, इतवारी, महाल, धरमपेठ, सदर और सक्करदरा जैसे व्यस्त बाजार इलाकों में त्योहारों के दौरान गाड़ियों का दबाव काफी बढ़ जाता है। इन इलाकों में भीड़, गलत ढंग से खड़ी गाड़ियों और रास्तों की बैरिकेडिंग को लेकर लोग सवाल कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यह हालत हर साल दिखती है, लेकिन पक्का हल न होने से वही परेशानी बार-बार लौट आती है।

बाजारों में बेतरतीब खड़े वाहन, मालवाहक गाड़ियों की आवाजाही और सड़क किनारे का अतिक्रमण ट्रैफिक को रोकते हैं। नतीजा यह कि कुछ मिनट का सफर भी लंबा खिंच जाता है। जाम में आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। नागरिकों के मुताबिक त्योहार से पहले प्रशासन और महानगरपालिका की समीक्षा बैठकें होती हैं और इंतजाम की योजना बनती है, पर इस बार लोग चाहते हैं कि सिर्फ अस्थायी उपाय न हों, बल्कि पार्किंग और ट्रैफिक के लिए लंबे समय की व्यवस्था बने।

कस्तूरचंद पार्क के आसपास के रास्तों और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। इस इलाके से भोपाल, छिंदवाड़ा और जबलपुर की तरफ जाने वाली कई गाड़ियां निकलती हैं। निजी गाड़ियों और यात्री बसों की आवाजाही के बीच रास्ते बंद करने या ट्रैफिक डायवर्ट करने से अतिरिक्त दबाव बन सकता है। स्थानीय स्तर पर मांग उठी है कि कोई भी रास्ता बंद करने से पहले वैकल्पिक रास्तों की क्षमता, गाड़ियों की संख्या और यात्रियों की सहूलियत का आकलन हो। लोगों का कहना है कि सिर्फ बैरिकेडिंग लगाकर समस्या नहीं सुलझेगी, ट्रैफिक का असरदार नियोजन जरूरी है।

इतवारी और सीताबर्डी जैसे बाजारों में भीड़ घटाने के लिए भोपाल के न्यू मार्केट की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है। इस मॉडल में बाजार के प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग और गाड़ियों के घुसने की समयसीमा तय करने का जिक्र है। तय समय के बाद बाजार में पैदल चलने वालों को प्राथमिकता देने से भीड़ काबू करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नागपुर में ऐसा कोई मॉडल लागू करने से पहले स्थानीय बाजारों की जरूरत, माल की सप्लाई, पार्किंग की उपलब्धता और व्यापारियों की रजामंदी का ध्यान रखना होगा।

दफ्तर से घर लौटने वाले कर्मचारी, खरीदारी को निकले परिवार और छोटे व्यापारी, सब जाम की मार झेलते हैं। नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन, नागपुर महानगरपालिका और ट्रैफिक पुलिस मिलकर वैज्ञानिक और स्थायी रणनीति बनाएं। इसमें पार्किंग व्यवस्था, बाजारों में मालवाहक गाड़ियों के घुसने का समय, वैकल्पिक रास्ते और ट्रैफिक डायवर्जन की साफ जानकारी होनी चाहिए। स्थायी पार्किंग नीति की मांग भी की जा रही है। लोगों का कहना है कि बाजारों की रौनक बनी रहे और नागरिकों को बेवजह जाम में न फंसना पड़े, इसके लिए समय रहते असरदार कदम उठाना जरूरी है।

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