गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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03:29 IST

सुप्रीम कोर्ट: सीट बेल्ट का नियम पहले से मौजूद, अब सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी पुलिस की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीट बेल्ट पर कानून पहले से साफ है, अब सवाल सिर्फ इसे सख्ती से लागू करने का है।

सुप्रीम कोर्ट: सीट बेल्ट का नियम पहले से मौजूद, अब सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी पुलिस की
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गाड़ी चलाते वक्त सीट बेल्ट लगाना कोई सलाह भर नहीं, बल्कि इसके लिए कानून पहले से मौजूद है। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इन नियमों को सख्ती से लागू कराने की जिम्मेदारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों यानी पुलिस की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर लोग इन नियमों का पालन करें तो सड़क हादसों में होने वाली कई मौतें रोकी जा सकती हैं।

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें सीट बेल्ट अनिवार्य करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ती जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ती वी. मोहना की बेंच ने की।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट का ध्यान सड़क हादसों में होने वाली मौतों की तरफ दिलाया। वकील ने दलील दी कि अगर गाड़ी में बैठे लोग और ड्राइवर सीट बेल्ट का नियम सख्ती से मानें, तो कई हादसों में जान बचाई जा सकती है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सीट बेल्ट को लेकर कानून पहले से ही साफ हैं, इसलिए अब असली मुद्दा इन नियमों को ठीक ढंग से लागू करने का है। बेंच ने यह सवाल भी उठाया कि देश के हर नागरिक और हर ड्राइवर से सीट बेल्ट का नियम कैसे पालन कराया जाए। कोर्ट के मुताबिक, कानून का पालन कराना और नियम लागू करना संबंधित पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियों का काम है। इससे यह भी साफ हुआ कि जो ड्राइवर सीट बेल्ट के नियम को नजरअंदाज करते हैं, उन पर कार्रवाई के लिए इन एजेंसियों को और असरदार कदम उठाने होंगे।

याचिकाकर्ता के वकील ने एक और मुद्दा कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक सीट बेल्ट लगाना जरूरी तो है, लेकिन कई गाड़ियों में फैंसी सीट कवर या दूसरे तरह के बदलाव कर दिए जाते हैं, जिसकी वजह से सीट बेल्ट का सही इस्तेमाल कई बार मुश्किल हो जाता है। याचिका में कहा गया कि गाड़ियों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे बदलावों को भी गंभीरता से देखने की जरूरत है।

सड़क हादसों में गाड़ी में बैठे लोगों की जान बचाने में सीट बेल्ट की अहम भूमिका है। हादसे के वक्त अचानक झटका लगने पर सीट बेल्ट शरीर को जरूरी सहारा देता है और गंभीर चोट या जान जाने का खतरा कम करने में मदद कर सकता है। इसी वजह से सुनवाई में यह बात उभरकर आई कि सीट बेल्ट के नियम का पालन करने से सड़क हादसों में कई मौतें टाली जा सकती हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि सीट बेल्ट के लिए नया कानून बनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गाड़ी चलाते वक्त सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य करने वाले कानून पहले से मौजूद हैं। बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को छूट दी कि वह अपनी याचिका की कॉपी संबंधित अधिकारियों के पास भेज सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार कर सकते हैं। यानी सीट बेल्ट लगाने का नियम पहले से बंधनकारक है, अब इसे सख्ती से लागू कराने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों पर है।

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