नागपुर में ऑटो में ठूंसी जा रही सवारियां, ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
नागपुर में ऑटोरिक्शा में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाने पर ट्रैफिक पुलिस से सख्ती और कार्रवाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।
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नागपुर की सड़कों पर ऑटोरिक्शा में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाने का मामला फिर चर्चा में है। लोग पूछ रहे हैं कि इस पर ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई कहां है।
सामान्य यात्री ऑटो में चालक के अलावा तीन यात्रियों को बैठाने की अनुमति का उल्लेख किया जाता है। इसके बावजूद शहर में कई ऑटो में चार-पांच सवारियां बैठाना आम बताया जा रहा है। कुछ मामलों में तो एक ही ऑटो में 12 से 14 लोगों को बैठाने का आरोप लगाया गया है।
शहर में हेलमेट न पहनने, सीट बेल्ट न लगाने या सिग्नल तोड़ने पर वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई होती है। लेकिन ऑटो में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाने के मामलों में कितनी सख्ती है, यही सवाल अब उठ रहा है।
शिकायतें आती रहती हैं कि कई इलाकों में यात्रियों को ऑटो के अंदर और बाहर, दोनों तरफ बैठाकर ले जाया जाता है। इससे ट्रैफिक व्यवस्था पर असर पड़ता है और यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।
क्षमता से ज्यादा सवारियां हों तो अचानक ब्रेक लगाने पर, मोड़ पर संतुलन बिगड़ने पर या दूसरे वाहन से टक्कर होने पर हादसे का खतरा बढ़ सकता है। ज्यादा कमाई के लिए यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करना गंभीर चिंता की बात है।
सीताबर्डी मेन रोड, नागपुर रेलवे स्टेशन परिसर, इतवारी बाजार, गांधीबाग, कॉटन मार्केट चौक, गणेशपेठ बस स्टैंड, सक्करदरा चौक, छत्रपति चौक, सदर, जरीपटका, ऑटोमोटिव चौक, मानेवाड़ा और मेडिकल चौक जैसे इलाकों में ऑटो की आवाजाही लगातार रहती है।
इन जगहों पर सवारियां चढ़ाने-उतारने के लिए ऑटो अचानक सड़क पर रोक दिए जाते हैं, जिससे ट्रैफिक रुकने की शिकायतें भी उठती हैं। ऐसे में इन भीड़ वाले इलाकों में निगरानी और नियमों के पालन की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।
ओवरसीटिंग की समस्या को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस से प्रमुख चौराहों और ऑटो स्टैंड पर विशेष अभियान चलाने की मांग की जा रही है। बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने और कार्रवाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की जरूरत भी बताई गई है।
ट्रैफिक नियमों का पालन सभी वाहन चालकों के लिए जरूरी है। सवाल यह है कि शहर में ओवरलोड ऑटो पर असरदार निगरानी कब बढ़ेगी। हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से नियमों का पालन पक्का करना यात्रियों की सुरक्षा के लिए अहम है।
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