समृद्धी महामार्ग पर 2026 के आठ महीनों में 142 हादसे, 128 लोगों की मौत
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच समृद्धी महामार्ग पर 142 हादसे हुए और 128 लोगों की जान गई, जो पूरे 2024 के 126 मृतकों से ज्यादा है।
मुंबई-नागपुर का सफर तेज, आरामदायक और सुरक्षित हो और महाराष्ट्र के विकास को नई रफ्तार मिले, इसी मकसद से 701 किलोमीटर का समृद्धी महामार्ग बनाया गया। यह महामार्ग दिसंबर 2022 से चरणों में ट्रैफिक के लिए खुलता गया। लेकिन जब से यह चालू हुआ है, हादसों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। पिछले साढ़े तीन साल में सैकड़ों परिवारों ने अपने अपनों को खोया है।
उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2025 में ही समृद्धी महामार्ग पर 185 हादसे हुए और 152 लोगों की मौत हुई। 2024 में 137 हादसों में 126 लोग मारे गए थे। 2026 के आंकड़े इससे भी ज्यादा चौंकाने वाले हैं। जनवरी से अगस्त, यानी सिर्फ आठ महीनों में इस महामार्ग पर 142 हादसे हुए और 128 लोगों की जान गई। यानी इन आठ महीनों में मरने वालों की संख्या पूरे 2024 के 126 मौतों से भी ज्यादा है।
पुलिस और सूचना के अधिकार के तहत सामने आए आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2022 से जनवरी 2026 के अंत तक 491 हादसों में 444 लोगों की मौत हुई थी। इसमें 2026 के पहले आठ महीनों के 142 हादसे और 128 मौतें जोड़ दें, तो अगस्त 2026 के अंत तक मृतकों की संख्या 572 पर पहुंचने की खबर है।
इन आंकड़ों को सिर्फ नंबर की तरह देखना सबसे बड़ी त्रासदी होगी। हर मौत के पीछे एक परिवार है, मां-बाप का सहारा है, बच्चों का भविष्य है, पत्नी की गृहस्थी है और कई सपने हैं। चंद सेकंड के हादसे में ये पूरी जिंदगियां उजड़ रही हैं।
हाल ही में धामणगाव रेलवे के पास समृद्धी महामार्ग पर हुआ भीषण हादसा इसका ताजा उदाहरण है। शेगांव से देवी की मूर्ति लेकर वर्धा लौट रहे नौजवानों की गाड़ी को पीछे से कंटेनर ने टक्कर मार दी, जिसमें सात लोगों की मौत होने की खबर है। त्योहार की खुशी में गांव लौट रहे इन नौजवानों का सफर आखिरी साबित हुआ। इससे पहले बुलढाणा जिले के पिंपळखुटा इलाके में हुए बस हादसे में कई यात्री जिंदा जल गए थे और उस घटना से पूरा महाराष्ट्र हिल गया था। उसके बाद भी हादसे थमे नहीं।
तो सवाल यह है कि इस महामार्ग पर इतनी जानें क्यों जा रही हैं। इसका जवाब सिर्फ ड्राइवर की गलती कहने जितना आसान नहीं है। अलग-अलग अध्ययनों और रिपोर्टों में तेज रफ्तार, ड्राइवर को आने वाली झपकी, थकान, लेन बदलते वक्त नियमों का उल्लंघन और 'हायवे हिप्नोसिस' जैसे कारण गिनाए गए हैं। लंबी, सीधी और लगभग बिना रुकावट की सड़क पर काफी देर तक एक ही तरह से गाड़ी चलाने से ड्राइवर की चौकसी घट सकती है।
लेन अनुशासन भी एक गंभीर मुद्दा है। खासकर भारी गाड़ियां अचानक लेन बदलती हैं, गलत तरीके से ओवरटेक करती हैं या सड़क पर गाड़ी खड़ी कर देती हैं, तो पीछे से आ रही गाड़ियों को रिएक्ट करने का पूरा वक्त नहीं मिलता। रात में यह हालत और खतरनाक हो जाती है। इसलिए ट्रक और दूसरी भारी गाड़ियों के लिए लेन अनुशासन की सख्त पाबंदी, ड्राइवरों की नियमित जांच और आराम की पर्याप्त सुविधाएं सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर उतरनी चाहिए।
सबसे अहम सवाल प्रशासन के सामने है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय हादसा होने से पहले उसे रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। रिपोर्टों में बताया गया है कि समृद्धी महामार्ग पर Intelligent Traffic Management System, यानी ITMS लगाने का काम चल रहा है। इस सिस्टम से रफ्तार, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और दूसरी बातों पर बेहतर निगरानी की कोशिश है। लेकिन सिस्टम लगाने और उससे मौतें सचमुच कम होने में बड़ा फर्क है। इसका असर लोगों को सड़क पर दिखना चाहिए।
समृद्धी महामार्ग महाराष्ट्र के विकास के लिए जरूरी प्रोजेक्ट है, इस पर कोई विवाद नहीं। सफर का वक्त घटा है, आवाजाही को रफ्तार मिली है और कई जिलों को मुंबई-नागपुर रूट से तेज कनेक्शन मिला है। पर विकास की रफ्तार इंसानी जान की कीमत पर नहीं नापी जा सकती। हर बड़े हादसे के बाद सिर्फ पंचनामा, जांच और मदद के ऐलान से बात खत्म करने का वक्त अब नहीं रहा। हर हादसे का कारण के हिसाब से अलग ऑडिट होना चाहिए। कहां हादसे बार-बार होते हैं, किस वक्त होते हैं, किस तरह की गाड़ियां ज्यादा शामिल हैं, कितने मामलों में तेज रफ्तार वजह है, कितनों में ड्राइवर की थकान मिलती है, सड़क पर खड़ी गाड़ियों से कितने हादसे होते हैं और हादसे के बाद एम्बुलेंस व मेडिकल मदद कितनी देर में पहुंचती है, इन सबके जवाब सार्वजनिक होने चाहिए। सैकड़ों मौतें सिर्फ एक आंकड़ा नहीं हैं, वे शासन, प्रशासन, महामार्ग प्रबंधन और समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
समृद्धी महामार्ग पर और कितनी जानें जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर दोबारा सोचा जाएगा, और कितने परिवार उजड़ने के बाद ठोस कदम उठेंगे, यह सवाल आज हर नागरिक पूछ रहा है। यह महामार्ग महाराष्ट्र की तरक्की की पहचान बने, हादसों की नहीं; रफ्तार की पहचान बने, डर की नहीं। सड़क आधुनिक हो गई, सफर तेज हो गया, अब सुरक्षा व्यवस्था भी उसी रफ्तार से आधुनिक होनी चाहिए। वरना विकास के नाम पर बना यह महामार्ग लोगों के मन में एक चुभते सवाल के साथ खड़ा रहेगा कि "समृद्धी" आखिर किसकी है और उसकी कीमत चुकाने वाले कितने हैं।
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