शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर को, शाम 5.44 से 8.16 बजे तक पूजा का मुहूर्त
शुक्रवार 23 अक्टूबर को शुक्र प्रदोष व्रत है। शिव और पार्वती की पूजा का मुहूर्त, पूजा की विधि और सुख-समृद्धि के लिए बताए गए उपाय।
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शुक्रवार 23 अक्टूबर को प्रदोष व्रत पड़ रहा है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन आती है, तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत की खास धार्मिक अहमियत मानी जाती है। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक प्रदोष काल में सही विधि से शिव परिवार की पूजा करने पर भक्तों को देवता का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है।
त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को दोपहर 2.35 बजे शुरू होगी और 24 अक्टूबर को दोपहर 1.36 बजे खत्म होगी। प्रदोष व्रत के दिन पूजा का मुहूर्त शाम 5.44 बजे से रात 8.16 बजे तक है। यानी पूजा के लिए 2 घंटे 33 मिनट का वक्त मिलेगा।
प्रदोष के उपवास में शाम को भगवान शिव की पूजा का खास महत्व है। सूर्यास्त के वक्त का प्रदोष काल शिवपूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान भक्त शिवलिंग की पूजा करते हैं, दिए जलाते हैं और सुखी जीवन के लिए भगवान शिव और देवी पार्वती से प्रार्थना करते हैं।
पूजा की विधि यह है कि सुबह नहाकर उपवास का संकल्प लें और भगवान शिव व देवी पार्वती को याद करें। शाम को पूजा की जगह साफ करें, शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और बेलपत्र, फूल व अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। देवी पार्वती की पूजा कर सुख, समृद्धि और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करें। आखिर में शिव और पार्वती की आरती करके पूजा पूरी करें।
सुख और समृद्धि के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। पहला, प्रदोष काल में शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ाएं और 'ओम नमः शिवाय' का जाप करें। माना जाता है कि शिव की उपासना से मन को शांति मिलती है और भक्त को मुश्किल हालात का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
दूसरा, भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की भी उपासना करें और प्रार्थना करें कि आपके वैवाहिक जीवन में प्यार, भरोसा और तालमेल बना रहे।
तीसरा, शाम को घर के मंदिर के पास दिया जलाएं। भगवान शिव और देवी पार्वती की आरती करें और परिवार की सेहत, सुख और शांति के लिए प्रार्थना करें।
चौथा, अपनी हैसियत के हिसाब से जरूरतमंद लोगों को अनाज, कपड़े या रोजमर्रा की जरूरी चीजें दान करें। धार्मिक नजरिए से दान और सेवा को पुण्य का काम माना जाता है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव को खुश करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से उपवास और पूजा करने पर मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्रवार का दिन आनंद, सुंदरता, प्यार और वैवाहिक तालमेल से भी जुड़ा है। इसी वजह से कई भक्त वैवाहिक सुख और परिवार की समृद्धि की चाह में शुक्रवार को प्रदोष व्रत रखते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की पूजा करने की परंपरा है।
धर्म, ज्योतिष, वास्तु जैसे विषयों की यह जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह जरूरी है।
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