शिवसेना के नाम और निशान के विवाद में सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट की दलीलें
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिंदे गुट के वकील ध्रुव मेहता ने व्हिप, अयोग्यता और विधानसभा की मियाद पर दलीलें रखीं। अगली सुनवाई दिवाली के बाद होगी।
नई दिल्ली: शिवसेना पार्टी और धनुष्यबाण निशान को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट में एक और अहम सुनवाई हुई। मामला एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के बीच सत्ता संघर्ष से जुड़ा है। सुनवाई में शिंदे गुट की तरफ से वकील ध्रुव मेहता ने अपनी बात रखी और कई मुद्दे उठाए। इसके चलते मामले को नया मोड़ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
मेहता ने व्हिप के बारे में दावा किया कि वह वैध है। उन्होंने 21 जून 2022 को हुई विधायकों की बैठक का हवाला दिया। उनके मुताबिक उस बैठक में एकनाथ शिंदे की विधिमंडल पार्टी नेता की भूमिका बनी रखी गई थी। मेहता ने यह भी कहा कि भरत गोगावले को प्रतोद नियुक्त किया गया था, इसलिए शिंदे गुट की ओर से जारी किया गया व्हिप वैध है।
विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर भी शिंदे गुट ने अपना रुख साफ किया। मेहता ने बताया कि भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास है। उन्होंने दलील दी कि अगर अध्यक्ष के फैसले में कोई कानूनी खामी मिले, तो आम तौर पर सही रास्ता यह है कि मामला वापस अध्यक्ष के पास भेजा जाए। मेहता के मुताबिक अध्यक्ष दसवीं अनुसूची के तहत न्यायनिर्णय का काम करते हैं, इसलिए उनके फैसले की न्यायिक समीक्षा कुछ तय मापदंडों पर ही हो सकती है।
शिंदे गुट ने एक और मुद्दा उठाया। ध्रुव मेहता ने दावा किया कि संबंधित विधानसभा अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उस समय के विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग का अब कोई व्यावहारिक असर नहीं बचा। अपनी दलीलों के समर्थन में उन्होंने राजेंद्रसिंह राणा और सुभाष देसाई मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया।
शिवसेना में फूट के बाद पार्टी के नाम, चुनाव निशान और विधायकों की अयोग्यता को लेकर चला आ रहा कानूनी विवाद अब तक खत्म नहीं हुआ है। इससे पहले ठाकरे गुट की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें रखी थीं। अब शिंदे गुट ने अपना पक्ष रखा है।
मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद होगी। महाराष्ट्र के सियासी हलकों की नजर इस पर है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में किन कानूनी मुद्दों पर गौर करता है और आखिर में क्या फैसला देता है।
यहां ध्यान रहे कि ये शिंदे गुट की ओर से कोर्ट में रखी गई दलीलें हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, इसलिए शिवसेना पार्टी और निशान को लेकर अंतिम फैसला आना बाकी है।
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