गोकुल अध्यक्ष चुनाव: 4 सरकारी निदेशकों को वोट का हक देने के फैसले पर सतेज पाटील नाराज
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कैबिनेट ने बड़ी सहकारी संस्थाओं में वोट का अधिकार रखने वाले सरकारी निदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इससे कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ के अध्यक्ष पद का गणित बदल सकता है।
कोल्हापुर के सहकारी क्षेत्र में अहम माने जाने वाले गोकुल दूध संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव अब सिर्फ निदेशकों की गिनती पर नहीं टिका है। राज्य सरकार के एक नए फैसले से इस चुनाव का पूरा हिसाब बदलने की संभावना बन गई है। कैबिनेट ने गोकुल पर 4 सरकारी नियुक्त विशेषज्ञ निदेशक बिठाने और उन्हें वोट का अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, यानी गोकुल, के चुनाव में कुल 25 सीटें थीं। इनमें से राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाडी ने 13 सीटें जीतीं। महायुति की अगुवाई वाली छत्रपति शाहू शेतकरी विकास आघाडी को 12 सीटें मिलीं। फिलहाल सतेज पाटील के नेतृत्व वाले गुट के पास 13 निदेशकों का बहुमत है। फिर भी अध्यक्ष चुनने वाली बैठक के लिए 14 निदेशकों की मौजूदगी जरूरी है, इसलिए चुनाव अटका हुआ है।
कैबिनेट ने जो प्रस्ताव पास किया, उसके मुताबिक 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं में वोट का अधिकार रखने वाले सरकारी निदेशक नियुक्त किए जाएंगे। गोकुल में 4 विशेषज्ञ निदेशक नियुक्त हुए तो अध्यक्ष पद का समीकरण बदल सकता है। इसके लिए कैबिनेट के फैसले के बाद राज्यपाल के दस्तखत से अध्यादेश निकलना जरूरी है। उसके बाद शीतकालीन अधिवेशन में इसे विधेयक का रूप दिया जाएगा। विरोधियों ने इस फैसले का तीखा विरोध किया है। महाविकास आघाडी ने इसे लोकतंत्र का गला घोंटना बताया है।
सतेज पाटील ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि साढ़े पांच लाख किसानों ने जो जनादेश दिया है, वह अगर ठुकराया जा रहा है तो वे चुप नहीं बैठेंगे। पाटील के मुताबिक वे सारे कानूनी रास्ते अपनाएंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे।
पाटील ने कहा कि पूरा बहुमत होने के बावजूद कोरम के लिए दो निदेशकों का समर्थन मांगा जा रहा है, महायुति की यह दलील हास्यास्पद है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नगर निगम में उनके पांच पार्षद कम हैं, तो महायुति उन्हें समर्थन देकर मेयर पद दिला दे।
पाटील ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने पत्र का जवाब देने के लिए यह फैसला लिया है। उनके मुताबिक उस पत्र पर दस्तखत कौन करे, इस बात पर महायुति के भीतर ही विवाद हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता के समीकरण 2029 में बदलेंगे और तब सब बातें याद रखी जाएंगी।
एक वोट की अहमियत समझाते हुए पाटील ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सत्ताधारियों को याद रखना चाहिए कि एक वोट से सरकार गिर सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि 10 तारीख की बैठक में महायुति के सभी निदेशक हाजिर रहेंगे और शशिकांत पाटील चुयेकर गोकुल के अध्यक्ष बनेंगे।
फिलहाल संख्या 13 बनाम 12 की है, लेकिन 14 निदेशकों का कोरम जरूरी है। अब अध्यादेश की आगे की प्रक्रिया, सरकारी निदेशकों की नियुक्ति और 10 तारीख की बैठक पर कोल्हापुर के सहकारी क्षेत्र की नजर टिकी है।
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