शिवडी किल्ला अब आरपीजी फाउंडेशन की देखरेख में, वरळी किल्ले के संरक्षण की भी तैयारी
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वैभव संगोपन योजना के तहत आरपीजी फाउंडेशन ने शिवडी किल्ला गोद लिया है। वरळी किल्ले के संरक्षण को भी इसी योजना से बढ़ावा मिलेगा।
मुंबई की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकपरंपराओं की विरासत को बचाकर अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए विरासत संरक्षण के काम तेज हो रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विशेष सहयोग से इन कामों को गति मिल रही है। महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग की वैभव संगोपन योजना के तहत विभाग की मंजूरी के बाद आरपीजी फाउंडेशन ने शिवडी किल्ला देखरेख के लिए गोद लिया है।
इसी योजना के जरिए वरळी किल्ले के संरक्षण को भी बढ़ावा देने का मकसद है। ऐतिहासिक इमारतों को सहेजना, स्थानीय संस्कृति का दस्तावेजीकरण, नागरिक सुविधाओं में सुधार और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार बनाना, यानी कई पहलुओं से मुंबई की विरासत को बचाने की कोशिश की जा रही है।
मुंबई के पूर्वी तट पर बसा शिवडी किल्ला शहर के समुद्री इतिहास का अहम हिस्सा है। किल्ले का ऐतिहासिक स्वरूप बचाकर उसे नई पहचान दिलाने के लिए वैभव संगोपन योजना के तहत आरपीजी फाउंडेशन ने इसकी देखरेख संभाली है। यह काम सांस्कृतिक कार्य विभाग की मंजूरी से हो रहा है।
किल्ले का इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण और मुंबई की समुद्री विरासत से इसका रिश्ता लोगों तक पहुंचाने के लिए एक संग्रहालय और जानकारी केंद्र बनाने की योजना है। इससे इस ऐतिहासिक जगह की अहमियत उभरेगी और नागरिक व पर्यटक मुंबई की ऐतिहासिक विरासत को करीब से देख सकेंगे।
आरपीजी फाउंडेशन की पहल द हेरिटेज प्रोजेक्ट के जरिए बाणगंगा, वरळी कोळीवाडा और शिवडी किल्ला के संरक्षण पर काम चल रहा है। इसमें शोध, लोगों की भागीदारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बुनियादी ढांचे का विकास और महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया जा रहा है। अब तक इस पहल से 50 हजार से ज्यादा नागरिकों तक पहुंचा जा चुका है और 270 से ज्यादा महिलाओं को रोजी-रोटी और उद्यमिता के लिए मदद दी गई है।
वरळी किल्ले के संरक्षण के लिए भी कोशिशें हो रही हैं। वरळी कोळीवाडा में विरासत संरक्षण का जो काम चल रहा है, उसे किल्ले तक बढ़ाने का लक्ष्य है। कोळी समाज का इतिहास, परंपराएं, जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान बचाकर इस विरासत को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर जोर है। वरळी कोळीवाडा में 71 से ज्यादा स्ट्रीट लाइट, 30 से ज्यादा जानकारी वाले बोर्ड और सात से ज्यादा सार्वजनिक भित्तिचित्र लगाए गए हैं। इससे इलाके की सुविधाएं बेहतर हुई हैं और कोळी समाज की सांस्कृतिक विरासत को सार्वजनिक मंच मिला है।
वरळी कोळीवाडा की 120 से ज्यादा महिलाओं को कौशल विकास और उद्यमिता के लिए सहयोग दिया गया है। शेफ्स ऑफ कोळीवाडा पहल के जरिए महिलाओं ने पारंपरिक कोळी खान-पान को नई पहचान दिलाई है। अलग-अलग फूड फेस्टिवल और प्रदर्शनियों में हिस्सा लेने से उनके हुनर को मंच मिल रहा है और स्थानीय परंपराओं को बचाने के साथ रोजगार भी बन रहा है।
मुंबई के ऐतिहासिक बाणगंगा तालाब के इलाके में भी विरासत संरक्षण के साथ इस जगह का इतिहास और सांस्कृतिक अहमियत लोगों तक पहुंचाने का काम चल रहा है। इस पहल के तहत 150 से ज्यादा महिलाओं को उद्यमिता, सिलाई और सेहत से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। अलग-अलग कार्यक्रमों और अनुभव आधारित गतिविधियों के जरिए 500 से ज्यादा पर्यटकों को भी इस विरासत स्थल से जोड़ा गया है।
मुंबई की विरासत सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं है। वह स्थानीय समुदायों की परंपराओं, कला, खान-पान और जीवनशैली में भी जिंदा है। इसीलिए विरासत संरक्षण के साथ इलाके की नागरिक सुविधाएं सुधारना, महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और पर्यटन को बढ़ावा देना भी अहम हो गया है। महाराष्ट्र सरकार की वैभव संगोपन योजना के जरिए शिवडी और वरळी जैसे किल्लों की देखरेख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदृष्टि से सफल होती दिख रही है।
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