आमने सामने विवाद: वंदना गुप्ते बोलीं, मानधन बढ़ाने की मांग में कुछ भी गलत नहीं
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दो कलाकारों को नाटक से हटाए जाने पर मराठी रंगभूमि में दो गुट बन गए हैं। वरिष्ठ अभिनेत्री वंदना गुप्ते ने वीडियो में दोनों पक्षों को अपनी बात समझाई है।
मराठी रंगभूमि पर इन दिनों 'आमने सामने' नाटक की खूब चर्चा है। यह नाटक पिछले कुछ महीनों से हाउसफुल चल रहा है और दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। लेकिन अब इसके पर्दे के पीछे का विवाद सामने आ गया है, जिससे रंगभूमि में दो गुट बन गए हैं। वरिष्ठ अभिनेत्री वंदना गुप्ते ने इस पूरे मामले पर अपनी दो टूक राय रखी है।
विवाद की शुरुआत नाटक में काम कर रहे दो कलाकारों को अचानक हटाए जाने से हुई। ये कलाकार हैं रोहन गुजर और केतकी विलास। दोनों ने नाटक के निर्माताओं से मानदेय बढ़ाने की मांग की थी। उनका सोचना था कि नाटक कामयाब हो रहा है और उनकी भी मेहनत लगी है, इसलिए थोड़ा मानदेय बढ़ना चाहिए।
निर्माता लीना भागवत और मंगेश कदम ने उन्हें नाटक से हटा दिया। रोहन और केतकी का आरोप है कि सिर्फ तनख्वाह बढ़ाने को कहने पर उन्हें एक रात में निकाल दिया गया।
इस पर लीना भागवत और मंगेश कदम ने भी वीडियो बनाकर अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि मानदेय बढ़ाने की मांग एक बार नहीं, बल्कि तीन बार की गई थी। इसी वजह से मजबूरी में उन्हें यह सख्त फैसला लेना पड़ा, ऐसा उन्होंने साफ किया। आरोप-प्रत्यारोप के बाद मराठी जगत के कई कलाकारों ने अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी।
वंदना गुप्ते ने इस मामले पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जो काफी वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की है। वीडियो में वे लीना और मंगेश से कहती हैं, "लीना और मंगेश, मैंने तुम्हारा वीडियो देखा। तुम रो रहे थे, यह देखकर मुझे भी बहुत बुरा लगा। हम सब कलाकार हैं, इस हालात से हम भी गुजरे हैं। मुझे याद है, मेरे एक शो का मानदेय 80 रुपये था। उसे 100 रुपये करवाने के लिए मैं मोहन काका के पास 15 बार गई थी। फिर 100वें शो पर उन्होंने मेरा मानदेय बढ़ाया।"
आगे वे कहती हैं, "तुम दोनों भी कलाकार हो, तुम्हें ये बातें समझनी चाहिए। नाटक बंद करना हो तो ठीक है, लेकिन इस तरह अचानक बता देना कि आज तुम्हारा आखिरी शो है, यह सही नहीं है। कल कोई तुम्हारा ऐसे अपमान करे तो क्या तुम्हें मंजूर होगा? मंगेश, तुझे मंजूर होगा क्या? ऐसा नहीं करना चाहिए।"
वंदना गुप्ते ने रोहन और केतकी को भी समझाया। उन्होंने कहा, "कलाकार के तौर पर तनख्वाह बढ़ाने की मांग करने का हमें पूरा हक है। पर तीन-तीन बार अलग-अलग मांग करना भी ठीक नहीं है। तुम्हें भी थोड़ा सोचना चाहिए था।"
उन्होंने यह भी कहा, "हर किसी की जरूरत होती है, हर किसी का स्टेटस बढ़ता रहता है। मैं खुद 50 साल काम करने के बाद भी मानदेय बढ़ाने को कहने से डरती हूं। लेकिन आज के नए बच्चे अपना हक मांगना चाहते हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर किसी को लगता है कि नाटक को कामयाबी मिल रही है तो उसमें हमारा भी हिस्सा है। पर इस तरह की बहस और झगड़े अच्छे नहीं हैं।"
आखिर में वंदना गुप्ते बोलीं, "मैं यह एक कलाकार के तौर पर कह रही हूं, निर्माता के तौर पर नहीं। इस विवाद को ऐसे मत बढ़ाइए।" उनके इस वीडियो के बाद कई कलाकारों ने उनका समर्थन किया है। कमेंट में कई लोगों ने लिखा है कि उन्होंने दोनों पक्षों की बात बिल्कुल सही ढंग से रखी। अब देखना यह है कि यह विवाद कैसे सुलझता है।
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