गुणरत्न सदावर्ते बोले, 4 अक्टूबर के मोर्चे को लेकर राज ठाकरे का पर्दाफाश करेंगे
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर मनसे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) 4 अक्टूबर को मुंबई में साझा मोर्चा निकालने वाले हैं, इसी पर वकील गुणरत्न सदावर्ते ने राज ठाकरे पर निशाना साधा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाले चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में गर्मी आ गई है। इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मिलकर 4 अक्टूबर को मुंबई में जनमोर्चा निकालने का ऐलान किया है। राज ठाकरे ने बताया कि यह मोर्चा एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर आयोजित किया जा रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में वकील गुणरत्न सदावर्ते ने राज ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। सदावर्ते का दावा है कि 4 अक्टूबर का यह मोर्चा कामयाब नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि राज ठाकरे आदित्य ठाकरे से जुड़े मामले पर भी अपनी भूमिका साफ करें। सदावर्ते ने चेतावनी देते हुए कहा कि वे राज ठाकरे का पर्दाफाश करके रहेंगे।
सदावर्ते ने राज ठाकरे के आंदोलन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने ओबीसी, मेहनतकश, वंचित और अनुसूचित जाति के छात्रों से राज ठाकरे की भूमिका का विरोध करने की अपील भी की।
सदावर्ते ने राज ठाकरे की राजनीति को 'राजनीतिक दुकानदारी' करार दिया। उनका कहना था कि अगर मुंबई बंद या सड़कें बंद की गईं तो आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने साफ कहा कि वे आंदोलन की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और आगे भी राज ठाकरे पर टिप्पणी करने के संकेत दिए।
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर राज ठाकरे ने जो रुख अपनाया है, उस पर भी सदावर्ते ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इंटर डिपार्टमेंटल कम्युनिकेशन और फाइल नोटिंग कोई अदालती फैसला नहीं होते। सदावर्ते का तर्क है कि फाइल नोटिंग के आधार पर कोई भी हक साबित नहीं किया जा सकता।
इस बीच राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने 4 अक्टूबर के मोर्चे में शामिल होने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील की है। राज ठाकरे की घोषणा के मुताबिक मोर्चे का ठीक समय और जगह बाद में बताई जाएगी।
सदावर्ते ने राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी की नेता सुप्रिया सुले के किसान आंदोलन पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि किसानों की भावनाओं पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। 'गाड़ियां रोको, जेल जाने को तैयार रहो' जैसे आंदोलन के आह्वान पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
इसी दौरान महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए सरकार की तरफ से राहत के उपायों पर फैसला लेने की प्रक्रिया चल रही है। सदावर्ते ने मांग की कि खेतमजदूरों और छोटे किसानों तक सूखे की मदद पहुंचनी चाहिए, साथ ही अनाज और राशन का इंतजाम भी किया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने सूखा घोषित किया, इसके लिए उन्होंने बधाई देते हुए सूखाग्रस्त इलाकों के लिए तुरंत आदेश जारी करने की मांग की।