विरार में आबादी के बीच अवैध पटाखा फैक्टरी पर पुलिस का छापा, तीन के खिलाफ मामला दर्ज
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
विरार पूर्व की घनी बस्ती में बिना परमिशन चल रही पटाखा फैक्टरी पर पुलिस ने छापा मारा। करीब 13 लाख रुपये का माल जब्त हुआ और तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
विरार पूर्व की घनी आबादी वाले इलाके में बिना इजाज़त चल रही एक पटाखा फैक्टरी पर पुलिस ने छापा मारा। अपराध प्रकटीकरण कक्ष-2 की टीम ने गुरुवार शाम यह कार्रवाई की। मौके से विस्फोटक रसायन और कच्चे माल समेत 12 लाख 98 हजार 550 रुपये का माल जब्त किया गया है। पुलिस के मुताबिक इस कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।
चंदनसार रोड पर जी. एम. बेवरेज कंपनी के पड़ोस में मर्चट एंटरप्राइजेज नाम की पटाखों की दुकान है। इस दुकान की इमारत की ऊपर की दो मंज़िलों पर बिना किसी सरकारी लाइसेंस के पटाखे बनाए जा रहे थे। आग से बचाव के नियमों को भी ताक पर रखा गया था और काम बेहद ख़तरनाक तरीके से चल रहा था। क्राइम ब्रांच को खबर मिली थी कि तैयार पटाखे सीधे नीचे की दुकान से बाज़ार में बेचे जा रहे हैं। इसी गुप्त सूचना पर पुलिस ने 5 नवंबर को शाम पौने सात बजे के आसपास छापा मारा और यह गोरखधंधा पकड़ा।
नियम के हिसाब से पटाखा फैक्टरी इंसानी बस्ती से सुरक्षित दूरी पर होनी चाहिए। यहां ज़रा सी लापरवाही से चिंगारी उठ जाती तो ज़ोरदार धमाका होता और सैकड़ों बेगुनाह लोगों की जान ख़तरे में पड़ जाती।
छापे के वक्त फैक्टरी में 17 मज़दूर बेहद असुरक्षित हालात में विस्फोटक रसायन संभालते मिले। पुलिस को शक है कि यहां एक नामी ब्रांड के नाम का ग़लत इस्तेमाल करके नकली पटाखे बनाए जा रहे थे। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस ख़तरनाक काम में नाबालिग बच्चों से तो काम नहीं करवाया गया।
इस मामले में सुलतान मासुमअली मर्चेंट (उम्र 65), सागर सुरेश पाष्टे (उम्र 39) और देवेंद्र अजय नाईक के खिलाफ विरार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।
राजन सिंह ने इस मामले की मुंबई आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) से गहरी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पटाखे बनाने में इस्तेमाल हुए ख़तरनाक रसायन, कच्चे माल की सप्लाई, उसके पीछे के पैसों के लेन-देन और कई ज़िलों में फैले नेटवर्क का पता लगाया जाना चाहिए।
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