सावली वनपरिक्षेत्र में चारगाव नदी पर वनराई बांध, 15 दिन में बने 100 बांध
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कम बारिश से गर्मी में पानी की किल्लत की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने सावली वनपरिक्षेत्र में जल संरक्षण मुहिम चलाई है। 6 नवंबर 2026 को चारगाव नदी पर रेत की बोरियों से बड़ा बांध बना।
इस साल बारिश कम हुई है, इसलिए आने वाली गर्मी में पानी की किल्लत पैदा होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखकर वन विभाग सावली वनपरिक्षेत्र में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण मुहिम चला रहा है। इस मुहिम के तहत 6 नवंबर 2026 को चारगाव नदी पर रेत की बोरियों की मदद से एक बड़ा बोरी बांध खड़ा किया गया।
यह काम चंद्रपुर के विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले और चंद्रपुर के सहायक वनसंरक्षक विकास तरसे के मार्गदर्शन में हुआ। अगुवाई सावली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी विनोद धुर्वे ने की।
नदी के पात्र में बने इस बांध से बहकर जाने वाला पानी रुकेगा और स्थानीय स्तर पर पानी का भंडार बनेगा। इस पानी से जंगली जानवरों और पक्षियों को पीने का पानी मिलेगा। साथ ही इलाके के जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण में भी मदद मिल सकती है। जंगल में ही पानी मिलने लगे तो मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष घटाने की कोशिशों को भी ताकत मिल सकती है।
मुहिम की खास बात यह है कि सावली वनपरिक्षेत्र की हर बीट में कम से कम पांच बोरी बांध बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इसी के हिसाब से पिछले 15 दिनों में पूरे वनपरिक्षेत्र में कुल 100 बोरी बांध बनाए गए हैं। इससे बारिश का पानी रोकने, उसे जमीन में उतारने और जंगल में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के काम को रफ्तार मिली है।
चारगाव नदी का बांध बनाने में सावली, पेंढरी, पाथरी, व्याहाड और राजोली, इन पांचों उपक्षेत्रों के क्षेत्र सहायक, वनपाल, वनरक्षक, बीट मददगार, PRT दल और वनमजदूर अपनी मर्जी से जुटे। सबकी सामूहिक मेहनत से काम पूरा हुआ।
उपक्षेत्र सावली से क्षेत्र सहायक एन. एल. सिडाम, सादागड के वनरक्षक एम. व्ही. मुंडे, टेकाडी की वनरक्षक कु. ए. ए. गित्ते और चकपरंजी के वनरक्षक आर. आर. मुरकुटे शामिल रहे। इनके साथ रोशन मडावी, दिनेश मडावी, नवनीत जराते, पुणेश्वर भोयर, राकेश गुंडावार, नागेश बद्दमवार, राकेश घोटेकर, शुभम देशमुख, अनिकेत जराते, अभिषेक भोयर, नितीन भोयर, वैभव गोहणे, समीर गोहणे और रितेश गोहणे ने भी काम किया।
उपक्षेत्र पेंढरी से वनपाल ए. एन. मेश्राम, पेंढरी के वनरक्षक डी. एल. गुरनुले और चारगाव के वनरक्षक आखाडे आए। बीट मददगारों में पेंढरी के मिथुन पेंदाम, चारगाव के नागनाथ नर्मलवार और मुंडाळा के विनोद जेंगठे शामिल थे, साथ में चारगाव का PRT दल भी रहा।
उपक्षेत्र पाथरी से क्षेत्र सहायक एम. जे. मस्के, पालेबारसा के वनरक्षक एस. टी. चुधरी, गेवरा के वनरक्षक एम. पी. इंगले और पाथरी के वनरक्षक के. पी. मुनघाटे ने हिस्सा लिया। उनके साथ द्रोणाचार्य लोनबले, राजेंद्र गेडेकर, विनोद वाघरे, विनायक भादे, सूरज कोटगले, टेकाजी वाढणकर, शामराव चौधरी और जगदीश मेश्राम भी थे।
उपक्षेत्र व्याहाड से क्षेत्र सहायक एम. व्ही. पुल्लेवाड, उपरी के वनरक्षक राजेंद्र डांगे, गायडोंगरी के वनरक्षक अक्षय मेश्राम, सामदा के वनरक्षक दिलीप शेडमाके और नवेगाव के वनरक्षक एकनाथ खुडे शामिल रहे। बीट मददगार गजानन पिपरे, रविंद्र रोहनकर, अनिल भोयर और विलास चुधरी ने भी काम किया।
उपक्षेत्र राजोली से राजोली के क्षेत्र सहायक ए. बी. शेळकि, राजोली के वनरक्षक एस. जे. आदे, चितेगाव के वनरक्षक एस. ए. नागोसे और गोलाभूज के वनरक्षक एन. वाय. बोरकर आए। क्षेत्र सहायक मददगार रामभाऊ कडस्कर, सूरज मारभते, समीर बावणे और विशाल कन्नाके भी इसमें जुटे।
"पानी रोको, पानी जमीन में उतारो" की सोच को सचमुच के काम में बदलकर वन कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाई। इस मुहिम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी सामने आई।
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