शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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सातारा जिला परिषद का कुपोषण के खिलाफ अभियान, कुपोषित बच्चों के लिए 15 लाख रुपये मंजूर

सातारा जिला परिषद का कुपोषण के खिलाफ अभियान, कुपोषित बच्चों के लिए 15 लाख रुपये मंजूर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

सातारा जिला परिषद के महिला व बाल कल्याण विभाग ने 'कुपोषणमुक्त सातारा' अभियान के लिए सेस फंड से 15 लाख रुपये की तरतूद की है। पूरक पोषण आहार में भी बदलाव को मंजूरी मिली है।

सातारा जिला परिषद के महिला व बाल कल्याण विभाग ने बच्चों की सेहत सुधारने और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए कुछ अहम कदम उठाए हैं। इसके तहत 'कुपोषणमुक्त सातारा' नाम का नया अभियान चलाया जाएगा। पूरक पोषण आहार को ज्यादा पोषक, पौष्टिक और सेहत के लिए बेहतर बनाने के लिए उसके घटकों में बदलाव करने की पहल भी की गई है।

अभियान के लिए जिला परिषद के सेस फंड से 15 लाख रुपये के प्रावधान का फैसला 29 अक्टूबर को हुई महिला व बाल कल्याण समिति की बैठक में लिया गया। यह रकम कुपोषित बच्चों के लिए रखी गई है।

इससे पहले 12 मई 2026 को हुई महिला व बाल कल्याण विषय समिति की बैठक में समिति की सभापति ऋतुजा शिंदे ने सुझाव दिया था कि पूरक पोषण आहार (HCM) में सफेद मटर की जगह चना दिया जाए। इस पर सरकारी स्तर पर नीतिगत विचार करके जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के आयुक्त, मुंबई से किया गया।

इसके बाद जिला परिषद ने 14 जुलाई को आयुक्त, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना, मुंबई के पास प्रस्ताव भेजा। आयुक्त ने इस पर सकारात्मक जवाब देते हुए 31 जुलाई 2026 को सफेद मटर की जगह हरी मटर, चना या लोबिया देने को मंजूरी दे दी।

राज्य के मुख्यमंत्री की सूचना के मुताबिक 'बच्चे के पहले 1000 दिन' की अवधारणा के तहत बच्चों की सेहत और पोषण को खास तरजीह दी जा रही है। सभापति ऋतुजा शिंदे और सातारा जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी याशनी नागराजन के मार्गदर्शन में सातारा जिले में स्वास्थ्य विभाग और महिला व बाल कल्याण विभाग मिलकर छह साल तक के बच्चों का स्वास्थ्य सर्वे (Screening) कर रहे हैं।

इस सर्वे से कुपोषित बच्चों की पहचान की जाएगी और उन्हें कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने के लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे। इसके लिए 'कुपोषणमुक्त सातारा' अभियान सातारा जिला परिषद की तरफ से चलाया जाएगा। जिला परिषद नई पहलों के जरिए बच्चों की सेहत, पोषण और सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दे रही है। पोषण आहार की क्वालिटी बढ़ाना, कुपोषित बच्चों के लिए खास आर्थिक प्रावधान और स्वास्थ्य विभाग के तालमेल से चल रहा सर्वे, इन तीनों से कुपोषणमुक्त सातारा की तरफ जिले का सफर तेज होगा।

ऋतुजा शिंदे ने कहा, "हर बच्चे को पौष्टिक आहार, अच्छी सेहत और सेहतमंद बचपन मिले, यह हमारा संकल्प है। कुपोषण सिर्फ सेहत की समस्या नहीं है, यह हमारी अगली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ी बात है। इसलिए बच्चों को दिया जाने वाला पोषण आहार ज्यादा पौष्टिक और सेहत के लिए बेहतर बनाने की हम कोशिश कर रहे हैं। सफेद मटर की जगह हरी मटर, चना और लोबिया का विकल्प मिलने की मंजूरी मिल गई है। साथ ही चीनी की जगह गुड़ इस्तेमाल करने के लिए भी सरकारी स्तर पर पैरवी की जा रही है।"

शिंदे ने आगे कहा, "'कुपोषणमुक्त सातारा' अभियान के लिए 15 लाख रुपये का प्रावधान करके कुपोषित बच्चों को खास पोषण सहायता देने का फैसला लिया गया है। प्रशासन, स्वास्थ्य तंत्र, आंगनवाड़ी सेविकाओं और अभिभावकों की मिली-जुली कोशिश से सातारा जिले का हर बच्चा तंदुरुस्त और सेहतमंद हो, इसके लिए हम कटिबद्ध हैं। क्योंकि सेहतमंद बच्चा ही समृद्ध सातारा की असली पहचान है।" शिंदे सातारा में महिला व बाल कल्याण समिति की सभापति हैं।

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