जूचंद्र के नगर निगम अस्पताल में 625 ग्राम के नवजात को 82 दिन के इलाज के बाद मिली नई जिंदगी
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वसई-विरार महानगर पालिका के जूचंद्र स्थित माताबाल संगोपन केंद्र में समय से बहुत पहले जन्मे बच्चे का वजन 82 दिन में 1 किलो 625 ग्राम हो गया। इलाज पूरी तरह मुफ्त रहा।
वसई-विरार नगर निगम के जूचंद्र में बने माताबाल देखभाल केंद्र में डॉक्टरों ने सिर्फ 625 ग्राम वजन के एक नवजात की जान बचाई है। यह बच्चा समय से बहुत पहले पैदा हुआ था। जन्म के बाद उसकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन 82 दिन चले इलाज के बाद उसका वजन अब 1 किलो 625 ग्राम तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि नगर निगम के इस अस्पताल में पूरा इलाज बिल्कुल मुफ्त किया गया।
बच्चे का जन्म 10 अगस्त 2026 को हुआ। पैदा होते वक्त उसका वजन महज 625 ग्राम था। इतने कम वजन की वजह से उसे सांस लेने में तकलीफ थी, इन्फेक्शन का खतरा था और शरीर का तापमान काबू में रखना भी एक बड़ी चुनौती थी।
ऐसे हालात में बच्चे को जूचंद्र के माताबाल देखभाल केंद्र के नवजात शिशु गहन चिकित्सा विभाग में भर्ती किया गया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गायत्री गोरख और बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अंजू तिवारी शुक्ला की देखरेख में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम ने लगातार 82 दिन तक बच्चे का खास इलाज किया और उस पर नजर रखी।
सही दवाइयों, पोषण और दिन-रात की मेडिकल देखभाल से बच्चे की सेहत में धीरे-धीरे सुधार आता गया। जन्म के समय जो वजन 625 ग्राम था, वह अब 1 किलो 625 ग्राम हो चुका है। यानी इन 82 दिनों में बच्चे का वजन पूरे एक किलो बढ़ा है।
इस कामयाबी पर स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष निलेश देशमुख, समिति के सदस्य डॉ. शुभांगी पाटील, आशिष वर्तक, अरुणा डाबरे और चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भक्ती चौधरी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मेडिकल टीम की तारीफ की।
इस मौके पर स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष निलेश देशमुख ने कहा कि निजी अस्पताल में इस तरह के इलाज पर लाखों रुपये का खर्च आ सकता है, जबकि नगर निगम के अस्पताल में यह पूरी चिकित्सा सेवा मुफ्त दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम के अस्पतालों में हर साल औसतन 10 हजार सुरक्षित प्रसूतियां होती हैं और आम लोगों के लिए ये अस्पताल वरदान साबित हो रहे हैं।
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