मुंबई की हवा खराब, सड़क पर खड़े ट्रैफिक पुलिस वालों को सांस की तकलीफ
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई में बढ़ते प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर रोज आठ से दस घंटे सड़क पर ड्यूटी करने वाले ट्रैफिक पुलिस वालों पर पड़ रहा है।
मुंबई प्रदूषण की चपेट में है और इसका सबसे ज्यादा असर उन ट्रैफिक पुलिस वालों पर पड़ रहा है, जो रोज आठ से दस घंटे सड़क पर खड़े रहकर ट्रैफिक संभालते हैं। सड़क पर उतरकर ट्रैफिक कंट्रोल करने वाले ज्यादातर पुलिस वालों को किसी न किसी तरह की सांस की बीमारी लगी हुई दिख रही है।
इन पुलिस वालों का सामना सिर्फ धूल और तेज धूप से नहीं होता। लाखों गाड़ियों से निकलने वाली कार्बन डाय ऑक्साइड से भी उन्हें रोज जूझना पड़ता है। एमआईडीसी इलाके में और जहां-जहां प्रोजेक्ट चल रहे हैं, वहां तैनात ट्रैफिक पुलिस वालों की हालत ज्यादा खराब हो रही है।
अक्टूबर के आखिर में मुंबई ने देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिने जाने वाले दिल्ली को पीछे छोड़ दिया था। महीना बदल गया, लेकिन हालात में कोई फर्क नहीं आया है। पिछले कुछ दिनों से दिन में कड़क धूप और रात में कुछ ठंडक का मौसम चल रहा है, जिसका असर शहर के लोगों पर हो रहा है। इसमें ट्रैफिक पुलिस सबसे ज्यादा प्रभावित है।
शहर के अलग-अलग इलाकों के ट्रैफिक पुलिस वालों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सर्दी, जुकाम और खांसी तो आम हो ही चुकी है। इसके अलावा सीने में दर्द, नाक और गले में खराश और कई दिनों तक न रुकने वाली खांसी ने उन्हें बेहाल कर दिया है। हालांकि यह बात कुछ ट्रैफिक पुलिस वालों ने ही कही है। मुंबई की खराब हवा को लेकर खबरें आ रही हैं और सोशल मीडिया पर जानकारों की चेतावनियां और लेख भी सामने आ रहे हैं।
इस साल अक्टूबर में मुंबई का वायु प्रदूषण खतरे के स्तर को पार कर गया। महीने के ज्यादातर दिनों में प्रदूषण के मामले में मुंबई दिल्ली से भी आगे रही। आईक्यू एयर की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई दुनिया का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 166 से 200 के बीच दर्ज किया गया।
मुंबई और उपनगरों को मिलाकर 102 बीट चौकियां हैं और 3 हजार से ज्यादा ट्रैफिक पुलिस वाले ड्यूटी करते हैं। यही पुलिस वाले शहर की रोज 27 लाख गाड़ियों का ट्रैफिक संभालते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शहर में 129 जगहों पर प्रदूषण के हॉट स्पॉट हैं और 30 से ज्यादा जगहों पर सरकार के ही अलग-अलग प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिससे धूल का प्रदूषण काफी बढ़ रहा है।
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