समृद्धि महामार्ग पर बनेंगे 15 पुलिस सहायता केंद्र, 420 पद मंजूर, अलग कंट्रोल रूम भी
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राज्य सरकार ने महामार्ग पर 15 पुलिस सहायता केंद्र और अलग कंट्रोल रूम को मंजूरी दी है। इसके लिए 420 नियमित पद बनाए जाएंगे।
नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग पर अब पुलिस की निगरानी पहले से कड़ी होगी। राज्य सरकार ने महामार्ग पर 15 पुलिस सहायता केंद्र और एक अलग कंट्रोल रूम बनाने को मंजूरी दे दी है। मकसद यात्रियों की सुरक्षा पक्की करना है।
इस रूट पर हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। ट्रैफिक नियम तोड़े जा रहे हैं, गाड़ियां तेज रफ्तार से दौड़ रही हैं और लूटपाट की घटनाएं भी हुई हैं। इन सब पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
गृह विभाग ने इसका सरकारी आदेश जारी कर दिया है। इसके मुताबिक 15 पुलिस सहायता केंद्रों और एक कंट्रोल रूम के लिए अलग-अलग संवर्गों के कुल 420 नियमित पद बनाए जाएंगे। इससे समृद्धि महामार्ग पर अपनी अलग और सक्षम पुलिस व्यवस्था खड़ी होने का रास्ता साफ हो गया है।
बताया गया है कि गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर के लगातार प्रयासों से यह अहम फैसला हो पाया। उन्होंने शासन स्तर पर बार-बार कोशिश की और आखिरकार राज्य सरकार ने सहायता केंद्रों और कंट्रोल रूम को हरी झंडी दे दी।
ये 15 केंद्र वायफल, वेलाकेली (वर्धा), धामणगांव आसेगांव, गावनेर तलेगांव-शिवणी, कारंजा लाड, मालेगांव जहांगीर, दुसरबीड, सिंदखेड राजा, निढोणा (जालना), सावंगी (छ. संभाजीनगर), हडस-पिपलगांव, कोकमठाण (शिर्डी), गोंदे-सिन्नर, पिपरी सद्रोद्दीन (इगतपुरी) और शाहपुर-खुटघर में खुलेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस पर गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने उनका आभार जताया। भोयर ने कहा कि समृद्धि महामार्ग की सुरक्षा व्यवस्था अब ज्यादा मजबूत होगी। उनके मुताबिक पुलिस सहायता केंद्रों और अलग कंट्रोल रूम से हादसों, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और आपराधिक गतिविधियों पर असरदार रोक लगाने में मदद मिलेगी।
केंद्र शुरू होने के बाद महामार्ग पर हादसा होने की हालत में पुलिस की मदद तुरंत मिल सकेगी। ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई होगी, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और अपराध पर काबू रखने में भी मदद मिलेगी। उम्मीद है कि इससे नागपुर से मुंबई तक सफर करने वालों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
समृद्धि महामार्ग राज्य का महत्वाकांक्षी और तेज आवाजाही वाला रास्ता है। फिर भी इस पर बढ़ते हादसों, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, वाहन चालकों की लापरवाही और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नियमित पुलिस गश्त, हादसे के वक्त फौरन मदद और अपराध पर नियंत्रण के लिए अलग पुलिस व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी।
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