गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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नागपुर के दाभा में बनेगा अंतरराष्ट्रीय कृषि सुविधा केंद्र, 879.63 करोड़ को सरकार की हरी झंडी

नागपुर के दाभा में बनेगा अंतरराष्ट्रीय कृषि सुविधा केंद्र, 879.63 करोड़ को सरकार की हरी झंडी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नागपुर के कृषि केंद्र के लिए संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति मिली। बिडगांव में नगर पंचायत भवन के लिए जमीन भी मुफ्त दी गई।

नागपुर में अंतरराष्ट्रीय कृषि सुविधा केंद्र बनाने की राह अब खुल गई है। मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस केंद्र के लिए संशोधित प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई। कुल 879.63 करोड़ रुपये के खर्च पर सरकार ने मुहर लगाई है। इसी बैठक में खेती, ट्रैफिक, शिक्षा, अदालतों, सहकारी संस्थाओं और जनकल्याण से जुड़े कुल 12 फैसले हुए, जिनमें नागपुर के हिस्से में सबसे बड़ी सौगात यही केंद्र है।

यह केंद्र दाभा इलाके में बनेगा। जमीन डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के कृषि महाविद्यालय की है और मौजा दाभा में आती है। यानी पूरा प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय की इसी जमीन पर खड़ा होगा।

खर्च का हिसाब दो हिस्सों में है। पहले चरण का असल बजट 235 करोड़ रुपये था। अब उसमें 342.72 करोड़ रुपये जोड़े गए हैं, तो पहले चरण की संशोधित मंजूरी 577.72 करोड़ रुपये हो गई। दूसरे चरण के निर्माण के लिए 301.91 करोड़ रुपये अलग से पास हुए हैं। दोनों को मिलाओ तो 879.63 करोड़ रुपये बनते हैं।

केंद्र ठीक से चले और उसका बिजनेस मॉडल बने, इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक नियामक समिति बनेगी। साथ में एक अलग से स्वतंत्र प्रबंधन समिति भी रहेगी। निर्माण का जिम्मा महाराष्ट्र राज्य अवसंरचना विकास निगम को दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह केंद्र खेती की नई तकनीक, रिसर्च और जानकारी के लिए बड़ा वैश्विक मंच बनेगा, जहां कृषि प्रदर्शनियां लगेंगी और दुनिया भर के लोगों से बातचीत और विचारों का लेन-देन होगा। इलाके में खेती का ढांचा और सुविधाएं मजबूत करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।

नागपुर जिले की बिडगांव-तरोडी (खुर्द)-पांढुर्णा नगर पंचायत के लिए भी इसी बैठक में फैसला हुआ। नगर पंचायत को अपना प्रशासकीय भवन बनाने के लिए कामठी तहसील के मौजा बिडगांव में 1.86 हेक्टेयर सरकारी जमीन बिना कोई कीमत लिए दी जाएगी। यह जमीन तीन सर्वे नंबरों से निकलेगी: सर्वे नंबर 31 से 0.67 हेक्टेयर, सर्वे नंबर 32 से 1.06 हेक्टेयर और सर्वे नंबर 33 से 0.13 हेक्टेयर। तीनों मिलकर 1.86 हेक्टेयर होते हैं। जमीन नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी के नाम की जाएगी। इससे नगर पंचायत का अपना मुख्यालय बन सकेगा और स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गाड़ी चलाने वालों के लिए भी राहत है। मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र ट्रैफिक पुलिस चालान माफी योजना-2026 को हरी झंडी दी। इसमें बकाया ट्रैफिक ई-चालान की जुर्माना रकम पर एक बार 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी, यानी पुराने चालान कम पैसे में भरे जा सकेंगे।

हॉस्टल में रहने वाले पिछड़े तबके के छात्रों का मासिक खर्च भत्ता दोगुने से भी ज्यादा कर दिया गया है। यह फायदा अन्य पिछड़ा वर्ग, विमुक्त जाति, घुमंतू जनजाति और विशेष पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मिलेगा। संभाग स्तर के हॉस्टल के छात्रों को हर महीने 1,500 रुपये और जिला स्तर के हॉस्टल वालों को 1,300 रुपये दिए जाएंगे। महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के आखिरी साल के पशुचिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता भी बढ़ाया गया है, ताकि वे गांवों में जाकर जानवरों का इलाज करें और किसानों व पशुपालकों को सीधा फायदा पहुंचे।

अदालतों के मामले में पालघर जिले के तलासरी, मोखाडा और विक्रमगढ़ में तीन ग्राम न्यायालय खुलेंगे और इनके लिए 15 पदों को मंजूरी मिली है। नांदेड़ जिले के मुखेड में सीनियर स्तर की नियमित दीवानी अदालत बनेगी, जो पहले मंजूर हुई संयुक्त अदालत की जगह लेगी। गोंदिया शहर में नीलामी या पट्टे पर रहने के लिए दी गई जमीनों को बिना कोई शुल्क लिए वर्ग-1 में बदला जाएगा।

मुंबई के श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट ने राम मेंशन खरीदी है और उस पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी माफ कर दी गई। मकसद मंदिर परिसर का विकास और भक्तों की सुविधाएं बढ़ाना है। मुंबई की हैदराबाद (सिंध) नेशनल कॉलेजिएट यूनिवर्सिटी के नियमों में भी बदलाव पास हुआ, जो कुलाधिपति के कार्यकाल, उम्र की सीमा और कुलगुरु को दोबारा नियुक्त करने की शर्तों से जुड़ा है।

सहकारी क्षेत्र में दो बड़े फैसले हुए। जिन 18 वर्ग-अ सहकारी संस्थाओं का कार्यकाल खत्म हो चुका है और सूखे के हालात की वजह से जहां चुनाव टल गए थे, वहां प्रशासक नहीं बिठाया जाएगा। इसके लिए महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 और चुनाव नियमों में संशोधन को मंजूरी मिली। दूसरे फैसले में, जिन सहकारी संस्थाओं का सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये से ऊपर है, उनकी समितियों में पांच सदस्य नामित किए जाएंगे। इनमें एक सरकारी अधिकारी होगा, जो सहायक निबंधक से नीचे के दर्जे का न हो, और चार लोग ऐसे होंगे जिन्हें संस्था के कामकाज का तजुर्बा हो। सरकारी अधिकारी को वोट देने का हक नहीं रहेगा। चारों अनुभवी सदस्य वोट दे सकेंगे, लेकिन पदाधिकारी का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह व्यवस्था जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर लागू नहीं होगी।

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