रविवार, 11 अक्टूबर 2026

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20:16 IST

रूस ने डीजल निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई, क्या अब सस्ता होगा डीजल?

रूस ने डीजल निर्यात की पाबंदियां ढीली की हैं। सवाल है कि क्या इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे।

रूस ने डीजल निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई, क्या अब सस्ता होगा डीजल? तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

रूस ने अपने डीजल निर्यात पर लगी पाबंदियां ढीली करने का फैसला किया है। इस फैसले से दुनिया के तेल बाजार में हलचल है और सबकी नजर इस पर है कि भारत जैसे देशों पर इसका क्या असर पड़ेगा। सवाल यह भी है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम नीचे आएंगे।

दुनिया भर में इस वक्त जो उथल-पुथल चल रही है, उसका असर भारत समेत सभी देशों पर पड़ रहा है। ऐसे में कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लोग बारीकी से नजर रखे हुए हैं। रूस के इस फैसले का मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की सप्लाई करना अब पहले से आसान हो जाएगा।

बताया जा रहा है कि यह कदम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद उठाया गया है। इस फैसले का मुख्य मकसद विदेशी बाजारों में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना है और साथ ही रूस की अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करना भी है। लेकिन डीजल के दाम कितने नीचे आएंगे, यह मांग और सप्लाई पर निर्भर करेगा।

रूस का कहना है कि डीजल उत्पादन से देश की अंदरूनी जरूरतें पूरी होंगी और दूसरे देशों को भी सप्लाई देने में मदद मिलेगी। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के मुताबिक, डीजल के निर्यात और सप्लाई का इंतजाम करने के लिए सरकार तेल कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी।

इससे पहले रूस ने डीजल निर्यात पर रोक क्यों लगाई थी, इसकी वजह भी सामने है। यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा प्रोजेक्टों पर ड्रोन हमले किए थे, जिससे रूस की कुछ तेल रिफाइनरियों का कामकाज गड़बड़ा गया था। इससे देश में डीजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसी वजह से रूस ने पहले डीजल निर्यात पर पाबंदी लगाई थी, जिसे अब हटा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि डीजल की सप्लाई बढ़ाने के लिए रूस और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ है। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की अतिरिक्त खेप भेजने की योजनाएं शामिल हैं। शुरुआती दौर में करीब 5,00,000 मेट्रिक टन डीजल की सप्लाई होनी है। संकेत यह भी है कि अक्टूबर में 3,00,000 टन, नवंबर में 5,00,000 टन और उसके बाद 1,00,000 टन की सप्लाई होगी। इन आंकड़ों और सप्लाई की तारीखों की अलग से पुष्टि होना बाकी है।

रूस दुनिया के सबसे बड़े डीजल निर्यातकों में से एक है। इसलिए अगर रूस दूसरे देशों को ज्यादा डीजल भेजता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी उपलब्धता बढ़ सकती है। जिन देशों को डीजल की जरूरत है, उन्हें अतिरिक्त सप्लाई मिलने की उम्मीद है। इससे कीमतों पर बना दबाव कम हो सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है।

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