पति-पत्नी में पैसों पर खटपट? बचत बढ़ाने के लिए ये 4 आसान नियम अपनाएं
पैसों को लेकर घर में होने वाली बहस कम करने और बचत बढ़ाने के लिए चार आसान नियम।
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शादी और गृहस्थी हर किसी की जिंदगी का एक पड़ाव होता है, और इस पूरे सफर में पैसे का पहलू बहुत अहम रहता है। कई बार इसी को लेकर पति-पत्नी के बीच मतभेद हो जाते हैं। पत्नी की अक्सर यह शिकायत रहती है कि पति बहुत खर्च करता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, या आपका रिश्ता पैसे न बचा पाने के तनाव से जूझ रहा है, तो कुछ अहम टिप्स आपके काम आ सकती हैं।
मजबूत आर्थिक नींव खड़ी करने के लिए खुली बातचीत और साफ लक्ष्य जरूरी हैं। एक जोड़े के तौर पर पैसों का इंतजाम करना सिर्फ हिसाब रखना नहीं है, बल्कि जिंदगी की प्राथमिकताओं को आपस में मिलाना भी है। शुरुआत के लिए मशहूर 50/30/20 नियम पर आधारित एक कदम-दर-कदम और ठोस तरीका बताया गया है: 50% जरूरतें, 30% इच्छाएं या शौक, और 20% बचत या निवेश।
पहला नियम है अपने अकाउंट्स को सही ढंग से संभालना। किराया, किराना और यूटिलिटी बिल जैसे साझा खर्चों में हर साथी अपनी आमदनी के हिसाब से बराबर या अनुपात में हिस्सा डालता है। शौक और खरीदारी जैसे निजी खर्चों के लिए हर साथी अलग खाता रख सकता है, ताकि बिना किसी पछतावे के वह अपनी मर्जी से खर्च कर सके। आपातकालीन फंड, छुट्टियों या घर के डाउन पेमेंट जैसी चीजों के लिए अलग से फंड बनाना भी इसी नियम का हिस्सा है।
दूसरा नियम है अपना कैश फ्लो ट्रैक करना। बजट को ठीक रखने का एक आसान तरीका यह है कि हाथ में आने वाली कुल तनख्वाह को तीन हिस्सों में बांट दिया जाए। जरूरतों के लिए 50% रखा जाए, जिसमें घर का खर्च, किराना, स्वास्थ्य सेवा, आने-जाने का खर्च, कर्ज की न्यूनतम किस्त और यूटिलिटी बिल आते हैं। इच्छाओं के लिए 30% रखा जाए, यानी बाहर खाना, मनोरंजन, सब्सक्रिप्शन और घूमना-फिरना। बचत और कर्ज के लिए 20% रखा जाए, जिससे आपातकालीन फंड बने, रिटायरमेंट के लिए निवेश हो और ज्यादा ब्याज वाला कर्ज जल्दी चुकाया जा सके।
तीसरा नियम है आपातकालीन फंड तैयार करना। कोई बड़ा निवेश करने से पहले ध्यान इस पर लगाएं कि ज्यादा रिटर्न देने वाले बचत खाते (HYSA) में 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम जमा हो जाए। नौकरी चली जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या कोई अनचाही मरम्मत करवानी पड़े, तब यह रकम सुरक्षा कवच का काम करती है। इससे आपको ज्यादा ब्याज वाले क्रेडिट कार्ड पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
चौथा नियम है ज्यादा ब्याज वाला कर्ज चुकाना। अगर आप दोनों में से किसी पर क्रेडिट कार्ड का कर्ज है, या साधारणतः 7-8% से ज्यादा ब्याज वाला पर्सनल लोन है, तो उसे चुकाने को प्राथमिकता दें। यह आपके पैसों पर पक्के तौर पर ज्यादा रिटर्न पाने जैसा है, क्योंकि बकाया रखने पर ब्याज का खर्च आता रहता है।